Friday, September 2, 2011

नई सुबह इजाद की हमने,

१.

यूँ नई सुबह 
इजाद की हमने,
घुप्प अँधेरे में 
जला रखा खुद को....

२.

हँसता रहता हूँ 
मैं तो
चुप रहता है 
अन्दर जो अनचीन्हा..

  

3 comments:

  1. तुम्हारा..स्नेह भाई...

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  2. "तुम्हारा स्नेह भाई...
    एक ऊर्जा है जीवन की,
    शक्ति है नव-सृजन की,
    देती ठंडा सकूँ मुझे,
    प्रेरणा है जीवन की,
    यद्यपि की तुम पास नहीं,
    फिर भी आशीष बन कर,
    संघर्ष का साथी बनता,
    तुम्हारा स्नेह भाई..."

    रजनीकांत भैया को सादर समर्पित...

    ----मनीष

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