Wednesday, September 21, 2011

इज़ाज़त तुम्हारी मांगता हूँ.

१.
बना, दो  तसवीरें,
छिपा रखा है तुमने  
एक मन में अपने ,

दूजा लगा रखा,
चहरे पर मेरे .

२.


मर,
ज़िन्दगी की तलाश कर लूं .

इज़ाज़त तुम्हारी 
मांगता हूँ. 


३.


तुम्हारा मर्द चेहरा,
मैं नहीं 


मेरे भीतर 
खुद की न खोजबीन करो  


कपडे बदल भी 
सहेज देता हूँ मैं. 







4 comments:

  1. खुबसूरत, गहरी और भाव-पूर्ण अभिव्यक्ति ...
    पढ़ कर बहुत अच्छा लगा

    "इज़ाज़त तुम्हारी
    मांगता हूँ,
    जीवन के
    नव-सृजन के लिए..."

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  2. शुक्रिया मनीष.. हर बार अच्छा बना वापस करते हो..

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  3. तुम्हारा मर्द चेहरा,
    मैं नहीं


    मेरे भीतर
    खुद की न खोजबीन करो


    कपडे बदल भी
    सहेज देता हूँ मैं. bhaut hi sundar...

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  4. ये हुनर तो आप ही से सीखा है :)
    ...आभार

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