Thursday, October 13, 2011

मटमैले पहाड़ पर हरियाली ...

१.

घूमती धरती 
छलांग लगा जाता हूँ,

तेरी कक्षा से परे 
गिर जाता हूँ ,
शून्य में कहीं !

२.
 धुंए में बादल
बनाते थे,
वह बचपन था .

बादल को धुंआ धुआं 
देखा आज.


३.
 मटमैले पहाड़ पर हरियाली 
बेतरह तेरी याद आती है .

४.

कैनवास ,
धरती क्षितिज औ आकाश 
भागते चित्र 
सजोयें लम्हों तक 

ज़िन्दगी सिमटते जाना.

५.

उदास मुस्कान फूलों की,

मेरे भीतर 
ततैया मर जाता है .

3 comments:

  1. बहुत बहुत शुक्रिया..........

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  2. "धरती क्षितिज औ आकाश
    भागते....
    चित्र संजोये लम्हों तक..."

    बेहतरीन और अद्भुत

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