Monday, October 24, 2011

गाँव.................... village visit..86th F.C.


झांक, 
ट्रेन की खिड़की,
खेत समतल
हरियाली कहीं बिखरी,
नंग धडंग बच्चे,
धुल से बीन कंकर
फेंकते,
हँसते, मुस्काते, टाटा बाय बाय  करते,
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    गाँव रोमांटिक है,
    ट्रेन की खिड़की से.

२.

आओ,
पधारो !

माई बाप आप हो,

पढ़ी होंगी, 
किताबें हज़ार, हमारे बारे में.
लिख दोगे 
किताबें हज़ार, हमारे बारे में.

महाराज हैं
आप सभी लोग
आओ 
पधारो!

खँडहर हम,
बिखेर जाओ थोड़ी जूठन,
आखिरी बार आना है 
माई बाप, किसी गाँव आपका.

Thursday, October 13, 2011

मटमैले पहाड़ पर हरियाली ...

१.

घूमती धरती 
छलांग लगा जाता हूँ,

तेरी कक्षा से परे 
गिर जाता हूँ ,
शून्य में कहीं !

२.
 धुंए में बादल
बनाते थे,
वह बचपन था .

बादल को धुंआ धुआं 
देखा आज.


३.
 मटमैले पहाड़ पर हरियाली 
बेतरह तेरी याद आती है .

४.

कैनवास ,
धरती क्षितिज औ आकाश 
भागते चित्र 
सजोयें लम्हों तक 

ज़िन्दगी सिमटते जाना.

५.

उदास मुस्कान फूलों की,

मेरे भीतर 
ततैया मर जाता है .