Wednesday, June 29, 2011

शाम ढलते ढलते..

शाम ढलते ढलते 
चाँद पिघल जाता है .

हर रोज़,
कोट में अपने 
अकेला छोड़ जाता हूँ 

चाँद को,पिघल जाने को
दिल को,जल जाने को .

शाम ढलते ढलते
धरती कुछ और उदास हो जाती है . 

Sunday, June 26, 2011

क्या कुछ 
कितना कुछ है 
मेरा.
 
ये आदमी, 
मेरी किस्मत बारह पंजों से नोचता 
शफ्फाक मेरे आईने से झांकता है मुझे,

ये औरत ,
तमाम मर्दों की तह में रख नीचा
अस्तित्व की नोंक से खरोंचती है मुझे,

क्या कुछ 
कितना कुछ है 
मेरा 

रक्त मेरा,
खौलता रहा - भाप बन उड़ता रहा
सराबोर तिक्त स्याह से करता है मुझे,

उन्छुआ ख्वाब ,
तमाम उम्र करता रहा पहरेदारी,
जल धू धू  एकाकी कर गया है मुझे,

क्या कुछ
कितना कुछ है 
मेरा

मेरा मैं , मेरी औरत,रक्त, ख्वाब मेरे 
कुछ भी 
क्या है मेरा.......




क्या बचता है अचानक 
भरभरा कर गिर जाने के बाद 
क्या इतना कुछ, 
समझ में आये नहीं 
ताउम्र 
जीते हुए एक पल का कम्पन. 

क्या बचता है 
मृत्यु पश्चात 
क्या इतना कुछ,
ज़िन्दगी बाकी 
घुट घुट नापे लम्हों को.

क्या बचता है 
तुम्हारे जाने के बाद. 

Saturday, June 25, 2011

याकि / मेरी मौत से ही यारी है .

बीत रहा  हूँ मैं 
रचा जा रहा है समय.

नहीं पता अब तक 
मैं मौत के आगे 
भागता,बचता हुआ
याकि 
मौत  इंतज़ार में आगे कहीं बैठी हुई .

रुक जाऊं 
दबोच न ले आ पीछे से 
भागता मैं 
न बाँध लूँ जा आगोश के घेरे.

मौत मुझको लिए फिरता है 
इस जीवन 
याकि 
मेरी मौत से ही यारी है
.


Friday, June 24, 2011

hamne


हमने ओढ़ी पहले पहल 
उदासी, 
बाद 
आदत में कर शुमार  
ओढ़े रहती है हमें 
उदासी .


Wednesday, June 22, 2011

मेरी आह, दूर तलक करती है शोर .

तुम्हारी खातिर....
तुम्हारे मौन की खातिर,
  
फैसला किया मैंने... 
खामोश हो जाने का 
खामोश हो जाने का , सदा ही चुप जाने को. 

फैसला चुप हो जाने का
तोड़ कर स्वप्न, तोड़ आकांक्षाएं सारी
तोड़ देता  है
मुझको  को भी .

खामोश मै हो जाता हूँ 
मेरी आह, 
दूर तलक करती है शोर .

Tuesday, June 21, 2011

अब भी मैं

मैं अब भी हूँ
बड़ा विशेषज्ञ,
मनोभावों  का,
दुःख का ,
कष्ट का ,
पीड़ा का.

अब भी मैं 
देख लेता हूँ 
मृत्यु छाया, 
निराशा के गर्त में पड़े हुओं की दशा , 
एक प्रेम से विचलित की दूसरी दौड़,
एक साथ कई को बाँध रखने की ललक .

अब भी मेरे पास इलाज है 
इन सबका
जिन्हें अपना नहीं पाता
मैं खुद के लिए.. 

Monday, June 20, 2011

गज़लें-2

कोई नहीं शिकायत, कोई नहीं गिला
मुझको मिला वही, जो दुनिया का सिलसिला .

मेरी चिता से रौशन, जगमग जो तेरे ख्वाब
तेरी कलम को दूँ मैं, मेरे सारे किताब .

महफ़िल  में मेरी अपनी, बदनाम हो गया हूँ
कहने लगे हैं लोग, नीलाम हो गया हूँ .

बादल पे पैर रख, थी जिंदगी परवाज़
कुमकुम भरा था कल, रीता हुआ है आज .

मुझपे थी भारी , मेरी उम्मीद की उठान  
गिरता गया हूँ हरदिन, मेरी जिंदगी ढलान .

तुमसे नहीं शिकायत, तुमसे नहीं गिला
तुमने किया वही जो दुनिया का सिलसिला .


Friday, June 17, 2011

आखिरी अनुरोध..2.

अब जब 
आ छूने को है मानसून हमें 
मेरी मिन्नत है 
कहीं और जा बरसे बादल
तुम बिन 
क्यूँ बिज़ली क्यूँ बारिश .

तुम 
मांग लेना 
और से सौगात छप छप की 

मेरी मिन्नत है
तुम नहीं,  
न सावन आए अबकी 



कभी नहीं हम साथ मोड़ से गुज़रे

१.

आजकल 
बारिश नहीं होती,
मन नहीं  आद्र  .

शुष्क आँखों से 
कोई 
मुलाक़ात नहीं होती.

२.

ज्वार उतरता है 
प्रेम भंग-सा .

छोड़ देता है
कीचड़,
मलाल 
खुद  ख़त्म होने का .

३.

आखिरी बार
जब कहा अलविदा हमने
कभी मैं नहीं था
कभी तुम अनुपस्थित. 

साथ साथ 
विदा नहीं 
हम,
कभी नहीं 
हम साथ मोड़ से गुज़रे  

Thursday, June 16, 2011

नई भाषा 
जिसे समझते हम केवल
नए गीत 
जिसे गाते हम केवल

हम देखते चार आँखों से
दो आँखों में तैरता 
मेरा बचपन 
दो आँखों में
रंगोली तेरी

नई गिनती 
जो नापती देह तेरी
नए चिह्न 
पहुँचाने को मेरे ख्वाबों तक

मैं जानता था 
मर जाओगी तुम इक दिन 
कुछ भी नया नहीं हुआ
तुम नहीं बची जिन्दा 

टूटे ख्वाब पर 
नहीं आया रोना मुझको.



Wednesday, June 15, 2011

जब  कभी
बच के निकलती 
तुम
छतरी ताने 
बचते हुए बर्फ वा बारिश से

तुम पर उड़ेल देता 
कर बादल उल्टा,
बंद मट्ठी में लाता
चुटकी बर्फ तुम्हे चखने को 
तुम नाराज़ होती 

मै जानता 
दिखावा है नाराज़ होना..

तप्त मन को पड़े फफोले 
हुई बारिश जब जम कर
मन और तपा
मैं और जला 
टूटे ख्वाब पर नहीं आया रोना मुझको..



Friday, June 10, 2011

गज़लें ...1.

रात गत होते, बारहा याद आए तुम
 पहले पहल आज ही, भूला तुमको .

मेरे अफ़साने पे, नहीं मुझको ही यकीं 
जला जो दिल , धुआं लगा तुमको .

तुम्हारे रंग कई थे,हैं, औ रहेंगे हरदम 
उदास आँख मेरी, देगी न जला तुमको .

मन था पत्थर  , अब तरल पिघला 
खुद में कैद, बौना सा दिखा  तुमको .

मलाल चाँद करेगा, रात कर रौशन
तोड़ते ख्वाब सब, ख्याल न आया तुमको .











Wednesday, June 8, 2011

जलना आत्मा का.........

रक्त जल, 
बने कालिख
तब 
बंद हो शायद 
सुलग जलना आत्मा का ?

भष्म 
सब स्वप्न कर 
आहुति दी 
संकल्पों की ;
फिर भी 
धुआं धुआं
सा जलता क्यों है .

क्या 
सचमुच  है 
कोई इश्वर,
लेता हुआ बदला .

धुआं धुआं 
बन 
छोड़ रही है,
आत्मा 
मेरा संग 

एक दिन आएगा
धुआं 
 ख़त्म हो जायेगा धुंए की तरह  
साथ में मेरा मैं. 




Saturday, June 4, 2011

अधूरे स्वप्न.....1.

तुम नाराज़ हो, उठने लगती,
समेट तुम्हे बाहों के घेरे 
सुनाता 
कई बार कहानी वही 
नायिका जिसकी, तेरी परछाई .

बंद मुट्ठी  में लाता,
थोड़े बादल..थोड़ी बारिश..
मलता होंठो पे तुम्हारे  थोड़ी बर्फ  
बाल कर गीले, छू लेता  
खा लेता थोड़ी डांट तेरी .

सारी रात 
साथ बुनते गीत
सारे दिन तुम अलसाती .  

पढ़ते हम  
कम किताबें-
बांया मैं, दांया पन्ना तुम .  
..............................................
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आज
जब किताबों की
की चिंदी,
अधूरे ख्वाबो पे नहीं आया रोना...

Friday, June 3, 2011

सड़कछाप लड़की-1.

सड़कछाप लड़की

सुलभ सबको
सबसे ही सहज

नहीं दबाती
अपनी हंसी
नहीं छिपाती
अपनी ख़ुशी

सड़कछाप लड़की
बनाती सफ़र को हसीं

अनेक से प्रेम,
मित्र अन्तरंग कई
सड़कछाप लड़की ;
रिक्त/ अपूर्ण कई
को करती पूर्ण .

सड़कछाप लड़की
ज़रूरी है .



Thursday, June 2, 2011

उदासी

१.

समय 
कुतरते
शाम
ढलते ढलते
उदासी
पा जाती है ;
मैं छिप नहीं पाता .

रात 
कटे 
टुकड़ा टुकड़ा 
मरते