Wednesday, October 22, 2014

बोझ यादों का भला।

१.

तर्क की गंध ही बारूदी 
हिसाब की लौ मद्धम। 
आग लगा दो हिसाब औ तर्क को। 

२.

नहीं बेहतर कुछ, रात की बारिश से 
अँधेरे में खुशबू और छपाछप। 
हो रात तो, करो बारिश। 

३. 

याद भी जलाती है 
स्वप्न झरते हैं यादों में। 
मन के खालीपन से बोझ यादों का भला। 




Monday, October 13, 2014

मतलब कोई नहीं।

१. 

सफर में  हैं 
मैं भी तुम भी। 
अंत तो है सफर का 
मतलब कोई नहीं। 

२.

अनुराग विराग सब 
तुमसे हैं। 
कुछ नहीं पार 
ज़िन्दगी के इस तरफ या उस तरफ। 

३. 

वार करो या सहो 
युद्ध नियति है। 
हमारा होना ही है 
जंग का होना।