Saturday, October 19, 2013

मैं चाहता हूँ

१. 

मैं चाहता हूँ,
लिखूँ एक ग़ज़ल, गुनगुना सके तू भी 
समझ आए कभी, कोई ज़ज्बात मेरे। 

२. 

मैं चाहता हूँ,
रचे तू जब तस्वीर, दिखूं मैं भी 
भले अनदेखी, इक दुआ पास हो तेरे। 

३. 

मैं चाहता हूँ,
लाल हो धरती औ स्याह आकाश जब 
झक सफ़ेद ही हो, चूनर तेरी। 







 

Friday, October 18, 2013

तमाम रंग हैं उजले।

१. 

ज़रूरी नहीं,
मुझसे जुड़ना। 
मेरी सार्थकता, जीने की हिम्मत बची रहे तुझमे। 

२. 

तमाम रंग हैं उजले। 
अंधेरे की, हिस्सेदारी रहने दो मेरी।  

३. 

मुद्दतों बाद मिलेंगे, पहचान लेना 
सूरत मेरी,
बदलती रहती। रहता मैं वहीँ स्थिर। 

Friday, October 4, 2013

बेरंग, रंग स्थाई

१. 

एक ताल है,
उदासी की भी।
मौत भी  
एक धुन है। 

२. 

बिखर जाना,
एक कला है।
बेरंग,
रंग स्थाई। 

३. 

पहचान गहरी,
एक छलावा। 
एक विराम है,
ख़त्म हो जाना।  
 


Wednesday, October 2, 2013

१.

सच सह नही पाता साथ 
एक सच
झूठा कर देता है, बाकि सब। 

२. 

मौत, तेरे आगे सब झूठे। 

३.

नहीं, कई बार कोइ मतलब। 
सच भी बेमतलब, झूठ बेमतलब। 




 


Sunday, September 29, 2013

इंतज़ार रहता है,

१. 

छुपा रह जाता है,
ख़त्म नहीं होता 
दर्द। 

२. 

नकली है, जीने की ललक 
इंतज़ार रहता है,
मौत तेरा। 

३. 

हम भी वाकिफ हैं 
तू भी तलबगार 
मिलेंगे शान से।  

Thursday, September 26, 2013

मौत होती रहती उम्र भर

१.

धडकन रुकती ही,
किसी एक पल 
मौत होती रहती उम्र भर

२.

मकसद नहीं, बेटी है ज़िन्दगी
मौत, नहीं इतनी भी उलझी।
सुलझी नहीं, भी ज़िन्दगी।

३.

हंसते हुए मिल सबसे
या चुपचाप अकेले
दिन अंतिम, कुछ सोचा नहीं अब तक।

४.

करीबी, सोचने नहीं देती।
मौत,
नहीं गलती मेरी, भूल जाता अक्सर तुझको।

५.

पता है,
चंद सिसकियाँ होंगी, होंगे चंद अफ़साने
मज़ा है, मरने में भी।

Tuesday, September 24, 2013

उदार हूँ, मौत तुझसे

१. 

मौत नहीं है
खुद, चुन न पाना साँसों का मतलब। 
मौत नहीं है 
देख, नहीं पाना ख्वाब कोई या ले पाना एक झपकी। 
मौत नहीं है 
सज जाना कब्रों की कतार में, बन एक शानदार मज़ार।  
 
मौत नहीं है, ये कविता। 

२. 

उदार हूँ, मौत तुझसे। 
उम्मीद नहीं, 
उदारता की तुमसे। 

३. 

अकेलापन, भी नहीं है मौत। 

Monday, September 23, 2013

नौकरी के चंद किस्से 2

१.

आवाज़ करे शोर
मद्धम जले लौ 
सांस बंद हो 
कुछ यही है, मांग तेरी। 
अफ़सोस,
फैले हैं, फेफड़े
जल रहा भभक मैं,
चुपचाप।  

२. 

पता है तुम्हे,कमी 
थोड़ी कैद की, लगनी है आज़ादी 
देखा है,
हालत अपने मुल्क की। 
पता है तुम्हे, सही 
रास्ते लग जाऊंगा मैं 
अंदाज़ा नहीं 
तुम हुए बुज़ुर्ग और मैं जवान हूँ। 




Sunday, September 22, 2013

तुम नहीं, कहीं भी मेरे भीतर

१.

तुम नहीं,  कहीं भी मेरे भीतर
रखूं कहाँ,
दिल नहीं, कहीं भी मेरे भीतर।

२.

टीस नहीं, न दर्द कोई अब 
पता है,
ज़िन्दगी आसान बहुत अब। 

३. 

मज़बूत बहुत, बहुत मज़बूत मन 
दरक जाता,
अचानक, कोई अनचिन्हा मन।  


Wednesday, September 18, 2013

घात , लगाए बैठे हैं सारे कौवे।


१. 

सड़ांध,
ऐसी समझ न आए 
बगल नाली की, बीट कौवे की या निज अस्मत की। 
समझ न आए, ऐसी 
सड़ांध,
अच्छी है, नाली, कौवे या खुद के लिए। 

२. 

भाई,
मत लौट के आना। 
घात ,
लगाए बैठे हैं सारे कौवे। 

३. 

दूब की इक डंठल
इतनी ही हरियाली।
ज़मीन से चिपक 
बच जा 
कौवों से। 




Tuesday, September 17, 2013

बंद हैं, दरवाज़े

१. 

खटखटा तो दूँ, 
दरवाज़ा 
तेरा, खुदा  
या खुद का। 
बंद हैं, दरवाज़े 
हम तीनो के। 

२. 

एक ही, सांकल 
छूटना है 
हमें।  
बस मौत आर पार है। 

३. 

तहखानो के 
खुले दरवाज़े,
तमाम ज़िन्न कैद जिनमें। 
बंद कर रखा है,
तहखानों को,
खुद के अन्दर। 





Friday, September 13, 2013

१.

कब मानोगे मरा
धड़कन रुके, मस्तिष्क ठप
या, पुतलियाँ हो ठंडी।
क्या कहोगे,
मर गयी हो चाह,
मरने की भी।

२.

बड़ा सवाल लेकिन
कब मानोगे जिंदा।

३.

सवाल है कि, ज़िन्दगी मौत से परे क्या।

४.

उलझन मेरी,
ज़िन्दगी बिना, मौत क्या संभव। 

जनतंत्र घरानों से परे..........


१.

जब भी,
बढ़ जाता है, मेरा रक्तचाप 
माफ़ी मांगने लगते हैं, नेहरु। 
काश,
वही एक गलती न करते आप 
काश,
जनतंत्र पनपता, घरानों से परे।

२. 
  कभी,
नज़र पड़ जाती है, मेरी 
शुक्रिया अदा कर देता हूँ। 
लंगड़ा हुआ, पर 
जिंदा है, मेरे देश में 
अभी भी, राज़ वोटों का। 






Thursday, September 12, 2013

चंद बातें नौकरी से.…

चंद बातें नौकरी से.… 

१. 

आज कल मेरा भी दिन है,
हर किसी का मुक़र्रर है, इक दिन। 

२. 

कुंकुआना औ भौंकना,
इतनी ही, भाषा मेरी। 

३. 

सफ़ेद मख्खन, काला स्वाद,
ज़िन्दगी, दुहरा मसाला।

४. 

बखूबी याद है, मुझे अपनी चीर फाड़,
नहीं दूजा अब, मुझसे बेहतर सर्जन।

५.

नहीं रही किसी को, मूछें
सवाल किसकी कितनी बड़ी पूँछ।  



Tuesday, September 3, 2013


1.

its depressing to be and doing nothing at all....
i am depressed to the core.............................

2.

its not the faith, nor the hope not even love,
best emotion to have, is 
ANGER...................................................

3.

no place for dreams..
time has come
to wake up...............

Thursday, August 29, 2013

एक, वायदा है निभा।

१. 

एक तस्वीर बराबर
ज़मीन का टुकड़ा 
औ 
दिल की कोठरी 
इतना ही,
सियासत मेरी।

२. 

तुमसे,
तक़रार तेरी निगाहों में। 
रक्ताभ कोनो को तनिक गाढ़ा, 
मुस्कान कर गहरी
जीती 
तुमने ही हर बाज़ी।

३. 

एक,
वायदा है निभा।
कमज़ोर कर न देना 
खुद मेरा होना,
है,
इसमे बस तेरी बदनामी 
और यही मंज़ूर
नहीं मुझको।

Tuesday, August 20, 2013

इतनी, बार लिखा तुमको।

१. 

इतनी,
बार लिखा तुमको।  
कि,
बस मेरी कविता में 
जिंदा तुम। 

२. 

एक,
अंत की तलाश में हूँ मैं। 
एक अंत,
जो कर दे परिभाषित 
मेरा होना अब तक। 

३. 

तुम,
जिसे चाहिए मेरा एक कोना। 
तुमने, 
ध्यान दिया ही नहीं 
लिखा है, बस अब तक तुमको। 

Thursday, August 15, 2013

मेरी चुप्पी भी, बस एक।

१. 

कोरा कागज़
लगता है,
बेहतर। 
लिख लिख 
मैं,
खराब करता, अपना ही, सफा। 

२. 

प्रेम परिधि 
गूंगी,
अच्छी। 
सुन, अनसुना 
कर,
बच निकलते, तुम।  

३. 

हर बार 
गरजता बादल,
या 
कोयल की कूक 
एक से ही, लगते मुझको।
बार बार 
की 
मेरी चुप्पी भी, बस एक। 



Wednesday, August 14, 2013

मेरी, उमर का ही हो गया है देश..

१. 

आज, 
बेतरह याद आती है 
जलेबी।
अगस्त पंद्रह और जलेबी 
एक ही थे 
बचपन में। 

देश,
भी अब जलेबी लगता। 
समझने में कठिन 
प्रिय पर, मेरा। 

२. 

मेरी,
उमर का ही हो गया है देश। 
पता है,
दिन अच्छे बीत गये। 

३. 

सरेंडर,
कर दिया है 
देश मेरे,
मैंने भी। 



Wednesday, August 7, 2013

फिर से हाज़िर हूँ हुज़ूर

ख़त्म हुआ
भ्रम,
मिट गई 
आशा,
अभिशप्त हैं पुनः जी उठने को। 

बहाने मिल ही 
जाते हैं 
ठहाकों को मेरे।

२. 

फिर से 
हाज़िर हूँ हुज़ूर 
आपके
दरवाज़े, खरीद लो 
कुछ 
मुस्कान।

Wednesday, July 17, 2013

गैरहाजिरी, रही उपस्थित हरदम

१. 

सुबह,
निराश हो गयी।
मैं निकला, कह 
लौट 
आऊँगा शाम ढले।
शाम,
रोज़ सहती मुझको।

२. 

तुम,
रूक नहीं पाए।
गिनती कर बंद,
वक़्त 
पसरा है लथपथ।
गैरहाजिरी,
रही उपस्थित हरदम।

३. 

सन्नाटा,
गहरी आवाज़ करता।
विरल खड्ड में,
आत्मा 
बिखरी, सिकुड़ी है।
उठान,
खोता अतित्व अपना।

Tuesday, July 16, 2013

१. 

जाने पहचाने छंद,
गीत  
बन जाते शोकगीत।
उदास तमाम पद 
लेते, 
ओढ़ मुझे।

२. 

हर नया रास्ता,
तुझ 
तक पहुच जाता।
उलझ गए हैं,
नक्शे 
ज़िन्दगी के।

३. 

बिखरी, बिसरी खुशियाँ,
पकड़ 
अब नहीं आती।
खाली हो गयी 
रेत 
भरी मुठ्ठी।








Monday, July 15, 2013

एक मित्र की कहानी का रूपांतरण

बर्फ पड़ती रही,
लगातार, बाहर 
बर्फ जमती रही,
अनवरत,
अन्दर।

सफ़ेद सड़को पर 
पसरी वीरानी 
दबे पांव 
घेर लेती है खालीपन मन का।
और तुम्हारा जाते जाना 
साथ रहना 
पास आस होना।

जमी बर्फ पिघला देती 
कुछ बिसरे फाग,
चंद रवींद्र गान।
सफ़ेद बर्फ झूठला देती 
कसौनी की शाम,
अनुराग के बासंती छींटें।

सफ़ेद बर्फ में,
दफना देती मैं 
अपनी नदी।
तुझतक मिलने तक 
बहती रही,
केवल तुझ तक ................
वक़्त है,
कि थिर वहीं।
तुम्हे बदलते देखा,
समय और मैंने।

ख्वाब रहे,
अजन्मे।
क़त्ल करता रहा,
जागता रहा मैं।

तुम हो,
कि प्रेय अब भी।
आस छोड़ी बस
ज़िन्दगी और मैंने।









Thursday, July 4, 2013

ढह जाना यूँ....

१.

ढह जाना
यूँ है कि,
खंडहर  दीखे नहीं

और  मलबा
समा जाए सीने में।

२.

टूटना
इस कदर,
कंहर के रह जाएं

न टूटे, न बिखरें
ख़त्म हो, सपना देखना।





  

एक ही, सुख

१.

एक ही,
सुख
दुःख नहीं अनपेक्षित।

२.

एक ही,
अभाव
कर सकना प्यार।

३.

एक ही,
दुःख
सुख नहीं सपना भी।

Wednesday, June 19, 2013

हमारी नियत इतनी ॥

१. 

न  चकित 
निराश नहीं । 
प्रेम, सत्कार 
परे , किसी छुअन से भी 
अभाव, भाव का 
 हमारी नियत इतनी ॥                               

२.  

हमें तलाश नहीं 
न आकांक्षा 
हमारा दौर 
असमय से समयातीत  
शून्य, समाज 
हमारी उपलब्धि ॥                                       

Monday, June 17, 2013

मैं, सो नहीं पाता॥

१. 

मेरी खिड़की से 
बहुत दूर 
नज़र आता है 
चाँद । 
अपनी हद से 
परे 
मैं,
जा नहीं  पाता  ॥   
                                          
२. 

रात और बढ़ जाती है 
जगा 
देख , मुझे । 
बंद आँखों भी, 
मैं, 
सो नहीं पाता॥  
                                                                      
३.

बेतरह  
लगती है,  भूख 
देख  रसोई  । 
भटक गया हूँ ,
इतना, घर 
मैं,
पहुँच नहीं पाता ॥                         

Friday, June 14, 2013

ख़याल कई

ख़याल कई,  
नहीं बांटे ॥  

बताया तो था, तुमको 
भोर की ओस, छूने की कशिश, 
चाहत मोर पंखों की, 
ख्वाब, नीले धुनों पर  थिरकन ॥ 

नहीं बताया कभी 
डर, झांकते कुँए में गिरने का 
भय, चलती ट्रेन से कूद जाने का 
दुह्स्वप्न आत्महत्या का  
तुमने भी तो छिपाया, मुझसे 

जो न, बांटो 
घट  जाता है ॥ 

Thursday, June 13, 2013

शुरू के चन्द चक्कर

शुरू के चन्द चक्कर 
लोग कहते हैं, हैं 
मुश्किल । 

हर सुबह ही , बस 
दुश्वारी 
दिन कट जाता है ।  

कुछेक चक्कर बाद 
पाँव खुदबखुद खींचते खुद को 
दिन ढो लेता है. 

सुबह की दौड़ औ ज़िन्दगी 
धकेल रहे खुद को 
चंद  चक्कर बाद 
रुक जाता हूँ 
रोज़ 
मशीनी दौड़ से आजिज़ आ,

बेशर्म ज़िन्दगी 
हर सुबह 
वही तमाशा करती ॥ 

रोज़ ही दौड़ने जाता हूँ  
मैं ॥  

Tuesday, June 11, 2013

अंत हुआ 
इसतरह 
अनंत का ॥ 

आशा ने दामन छोड़ा 
ख़त्म हुई 
निराशा ॥ 

नहीं  पता 
पर 
अभाव है, शून्य 
या पूर्णता मेरी ॥. 
ख़त्म हो जाता है / सचमुच,सबकुछ  / रह जाता है, / फिर भी मैं  ॥  परे, सन्नाटे के / नहीं आवाज़ / कोई / न ख्वाब,न क़त्ल उनका / खडा मिलता है / आतप्त  मैं  ॥ 

Monday, June 10, 2013

बुनता रहा मैं 
गीत । 

मेरे अनजान 
ही, 
चखते रहे 
मुझको 
गीत मेरे । 

चीरा मुझको 
मुझी से, पेट भरा 
रक्तस्नान कर 
शुद्ध हुए 
गीते मेरे । 

उन्ही शब्दों ने जिया मुझको 
जिनकी चौखट 
आसरा थी मेरी । 

प्रेम 
निर्लज्ज 
घृणा 
लज्जा । 

तार तार 
खुली, बुनाई 
मेरी ॥ 

Saturday, June 8, 2013

मेरा स्थिरपन  
नहीं  विस्मय  
चकित करता है 
मुझ तक पहुच जाना तेरा      

Wednesday, June 5, 2013

मैं हुआ  ठंढा 
लावा अन्दर नहीं जमता 
बादलों के कई घेरे 
मुझको घेरे 
मन फिर भी दहकता 

Sunday, May 5, 2013

इंतज़ार

इंतज़ार 
उस  एक पल का
बंद कर दोगे तुम,
प्यार करना।

मुक्त हो जाओगे 
तुम,
बंद कर दोगे 
नफरत भी।

Sunday, April 21, 2013

एक दिन और

१. 

एक दिन और 
पुनः एक दिन 

ज़िन्दगी खींच रहा।

एक दिन और, 
कोई तोहमत न आए तुझपर।

२. 

तुम्हे शिकायत है,
चाल चलन से मेरे।

मुझे पता है,
तुम्हे मेरी आदत नहीं।

३. 

इंतज़ार है मुझको 
तेरे लिए, या तुझको भी

बंद कर दोगे तुम 
प्यार मुझसे।

मुक्त मुझसे, मिले
तुझे धरती, आकाश तेरा। 



Thursday, March 14, 2013

ख़ुदा, बिलकुल तेरे जैसा..


१. 

ऊँचा और ऊँचा 
खुद के रहने की जगह ,
ख़ुदा,  बिलकुल तेरे जैसा। 
मैनें भी चुनी है जगह 
क़त्ल हुआ था जहां। 

२ .

समतल ही फैला
नहीं सहारा कोई चढ़ने को,
कुचला गया कदमों तले 
घास,
तुझ जैसा नरम चारा मैं।

३. 

परछाईं मेरी,
तुझ जैसा ही मैं।
महसूस नहीं ,मैं 
किसी छुअन को भी।
अपनी परछाईं भर, मैं।

Saturday, March 2, 2013

अंधकार

१.

रात कई गुज़री,
लगता है आज फिर,
नहीं सुबह कोई।
मेरा कोई अंत नहीं।

२.

अंधकार,
डराता है पहले।
डर लगता है,
उजाले से फ़िर।





Tuesday, February 26, 2013


 १. 

धरती है आग गोला,
हरियाली में छिपती।
मैं नहीं धरती जैसा . 

२. 

संगीत तुमको,
छेद छेद हुआ मैं।
बांसुरी बन . 

३. 

चुप हूँ,
सुन रहा।
जो नहीं भी मेरा .

४. 

उसने  सही अपनी,
तुमने सही अपनी।
सह रहा मैं किसकी .


Tuesday, January 15, 2013


1.

क्या आसान समंदर होना / खुद की थाह नहीं मिलती।

2.

नहीं मिलता जवाब कोई / क्या आसान सरल होना 

3.

बात ख़त्म हुई / मौन स्थाई भाव 

Saturday, January 5, 2013

2012

1.

समय नहीं बीता / मैं हुआ, समय बीता।

2.

मुर्दा मुझमे, दफ्न न हुआ सच।

3.

हंस नहीं पाया / रोया तो बस रोना आया।

4.

तुम मिले, तुम खो गए / रहे तुम, खो गया मैं।

5.

मार दिया मैंने / छू भी न गया एहसास एक।

6.

आठ रस हुए पूरे / ज़िन्दगी नहीं एकाकी।

7.


शब्द हुए निष्फल / कलप कलप चीखा  मौन।


8.

दिन बीते, अँधेरा छाया रहा हरदम।