Saturday, September 3, 2011

क्या बेहतर है.........

१.

क्या बेहतर है,

अपने पार्श्व 
प्यादे- सा 
रख लूँ खुद को ,
न पता हो
खुद को भी  

मैं, मरा या जिंदा.




२.


चिठ्ठियों चस्पा स्टाम्प-सा
लगा लूँ 
ठप्पा, 

इस्तेमाल न हो दुबारा


3. 


दोस्तों !

तुमने कहा और किया 
तब्दील, 
दोस्ती को प्यार में,

एक तरीका खोजो 
बदल सकें 
प्यार को दोस्ती में.







3 comments:

  1. पहला भाग मेरी समझ से परे है किन्तु दूसरा भाग अद्वितीय विचार अभियक्त कर रहा है...
    इन विचारों को मेरा अभिवादन...

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  2. ये तरीका बहुत आसान भी है, और बहुत मुस्किल भी है.... अच्छी प्रस्तुती....

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  3. समय निकला पढ़ा और टिप्पड़ी की.... बहुत बहुत आभार.........

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