Wednesday, April 27, 2011

मै नहीं था लायक/जान पाता सच

तुम धरा हो

मेह के नेह से भीगे
तुम्हारे अंतर में
हलचल है नुकीले हल की भी
तुमसे पनपी है यह बाजरे  की फसल !

मै नहीं था लायक
जान पाता सच

जान पता/ बीज भर नहीं है अवयव
सृज़न को चाहिए तुम्हे
बीज के साथ हल ओ जल भी !
तुम धरा हो

मै नहीं था लायक
जान पाता सच....

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फिर क्यूँ मैं हूँ.....

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