बरस रहा है जमा गर्द, जमी धूल, थमा बादल
भीग के और भभका, अदबदा जलता आंवा ;
बार बार तसल्ली , बार बार थपकी
टूट भी न रूकती सिसकी, रुके न आक्रंदन ;
परिक्रांत मन न देखे, बने अनबने राह नए
जीवन दीप जले न जले, उठे न राख से अखनुख कोई.
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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