अब जब
आ छूने को है मानसून हमें
मेरी मिन्नत है
कहीं और जा बरसे बादल
तुम बिन
क्यूँ बिज़ली क्यूँ बारिश .
तुम
मांग लेना
और से सौगात छप छप की
मेरी मिन्नत है
तुम नहीं,
न सावन आए अबकी
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
its beautiful.. :)
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