तुम्हारे लिए टूट पड़ता है सागर
किनारे विलीन हो जाते है अक्सर
रेत ही रेत पर बांधता मै मंसूबे
मंसूबो की खातिर तुम्हे चाहता हूँ
किनारे विलीन हो जाते है अक्सर
रेत ही रेत पर बांधता मै मंसूबे
मंसूबो की खातिर तुम्हे चाहता हूँ
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
wonderful poetry
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