Tuesday, May 31, 2011

मैं

१.

बच्चे की
हंसी सा,

गुलज़ार
सुगंध सा

काफूर हो भी,
बना रहता हूँ मैं .

२.

लब पर लिपटा 
अहसास ,

सिरहन
ख़म खयाली का

कभी अचानक ही
उमड़ पड़ता हूँ मैं .

Monday, May 30, 2011

प्रथम प्रेम पत्र

आदिम औरत की तरह  
ही हो सकता है
प्रथम प्रेम-पत्र मेरा .

बिना किसी हिचक
कह देना 
तुमने 
बर्बाद किया है  मुझे
पाप का फल दिया 
जूठा कर दिया है मुझे

धरती से बाँध
स्वर्ग मेरे गिर्द रचा
तुमने छुआ भी नहीं
मुझे कर दिया मिट्टी .

आदिम औरत की तरह
प्रथम प्रेम-पत्र मेरा
बिना हिचक कहेगा
मुक्त मुझे, बाँध

तुम हो हत्यारे .

आदिम औरत की तरह
प्रथम प्रेम-पत्र मेरा
तब लिखा जायेगा 
जब
प्रेम ख़त्म हो जायेगा 
आदिम पुरुष की तरह
तुम बसा लोगे नयी बस्ती  .

आदिम औरत की तरह 
प्रथम प्रेम पत्र मेरा
होगा
रूदन की गाथा
स्वत्व नष्ट होने की व्यथा
प्रेम हिंषा की कथा

आदिम औरत की तरह 
प्रथम प्रेम-पत्र मेरा 
प्रेम को लेकर
आखिरी अभिव्यक्ति होगी मेरी .








आखिरी अनुरोध

आखिरी अनुरोध 
तुमसे,
जिसपे 
हक जताता था कभी.

आखिरी अनुरोध 
मेरा ;
जिसको 
बहलाया करती थी 
तुम ,जिसे 
हक था भरमाने का .

आखिरी अनुरोध
तुमसे,

तुमसे परे,
दुनिया
जो कभी मेरी थी 
ग्रहण उसे न लगाओ

बचा खुचा है,
जो नहीं जल सकता 
और नहीं सुलगाओ .
 
तुमसे भागता हूँ
तुम ही तुम, न नज़र आओ .

आखिरी अनुरोध
मेरा,
जिसको क़त्ल किया तुमने

आखिरी अनुरोध
तुमसे,

पूरा ही मर जाने दो
जिंदगी दहशत है
पूरा ही मर जाने दो

अब और न भरमाओ
अब और न नज़र आओ .



  




   

Sunday, May 29, 2011

मैं भूत

"छठी कक्षा थी

शायद

अनुवाद से पहले

पाठ था

काल का .




कल प्यार था

आज प्यार है

प्यार रहेगा हरदम.




वाक्य नहीं बना पाता था

मेरा

भूत औ भविष्य.




वर्तमान, ही

की

संरचना




कुत्ता मरता है

मै रोता हूँ

तुम निष्ठुर हो .




इतने साल बीते

भविष्य नहीं बनता

प्यार रहेगा हरदम ???





वर्तमान हुआ भूत

भूत मुझमें अटका




मैं मरता हूँ

कुत्ता रोता है

तुम निष्ठुर हो .




मैं भूत

नहीं, वर्तमान

नहीं, भविष्य ."

Friday, May 27, 2011

मैं औ तुम

१.

नहीं पता है
नाराज़ किससे हूँ
खुद से ; खुदा से; या तुमसे
नहीं पता है
खतावार कौन

२.

तुम नहीं !
मै नहीं !

दोनों ही
गल्त नहीं
अलग अलग
हमारी सुब्ह
होती क्यूँ है

Wednesday, May 25, 2011

सच कहते हो

कहते हो
              मैं कल बीता
भग्न ह्रदय
             मन का रीता
सच कहते हो

सच कहते हो

जीवन जूआ
                   हरदम हारा
छन छन आई
                   धुप ख़ुशी की
श्याम अँधेरा
                  जीवन कारा

जीवन जुआ हरदम हारा

सच कहते हो

कहते हो
              मैं  टूटा तारा
बुझती आँखे
             मंद सितारा

सच कहते हो..







Monday, May 23, 2011

हँसता हूँ..

जब जब जलता हूँ
हँसता हूँ..

हँसता हूँ 
निज जल जाने पर
हँसता हूँ 
खुद मर जाने पर

जब जब मरता हूँ
हँसता हूँ..


हँसता हूँ
जब ख्वाब मिटे
हँसता हूँ
जब राह छिने

जब जब खोता हूँ
हँसता हूँ.. 

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...