रात आई भी तो
क्या सौगात हुई ,
दिन को ख़त्म हुए
अरसा हुआ अब तो !
ख़ुशी की उब से
बचना चाहा,
ज़िन्दगी औ गम
बने साथी ..........
१. समय के माप में, नाप रहे हम दूरी। समय निर्भर हमारी क्षमता पर क्षमता का विस्तार तुम तक, तुमसे दूरी क्षरण क्षमता का। २. न तरंग न पदार्थ रहे...
...
ReplyDeletejivan k sathi,
sukh aur dukh,
tisara koi nahi...
सुन्दर पंक्तिया...
ReplyDelete@ sushma ji..... thanks.
ReplyDelete@ manish.... sahi kahaa bhaai
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