Tuesday, August 30, 2011

ज़िन्दगी औ गम ........

रात आई भी तो 
क्या सौगात हुई ,
दिन को ख़त्म हुए 
अरसा हुआ अब तो !

ख़ुशी की उब से 
बचना चाहा,
ज़िन्दगी औ गम 
बने साथी ..........

4 comments:

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...