ठहरी बात रही
मेरी तेरी, पूर्ण है वचन उसका
कहा अनकहा
मसीहा स्वर है, शब्द है, भाव है
हम ठहरे हैं, ठहरी बात पर.
2.
हमारा काम,
काम आ जाना
मसीहा, वही काम है.
3.
राग लय विन्यास भिन्न नहीं
मेरे तेरे
हमारा अनुनाद, मसीहा संग.
एक भाषा
क्या होगा उसका जो ढोती है केवल झूठ.
याद रखी जायेगी, एक विलुप्त झूठी नदी की तरह
या
बहती रहेगी, ढोती हुई लोकतंत्र का सच
मसीहा की जयकार
संस्थाओं की लाश।
बहती रहेगी क्या तब भी जब आडम्बर नहीं होंगे
नहीं होंगे पंचसाला चुनाव।
जब झूठ नहीं होगा फ़र्क़ सच से,
क्या ज़रुरत होगी भाषा की।
सर पर ताज हो
मन भर आनाज हो
काम नहीं काज हो
साहेब सा राज हो।
चार चापलूस हों
हज़ार जासूस हों
कोटि कोटि भक्त हों
बोटी हो रक्त हो
कभी नहीं हार हो
जय हो जयकार हो।
नंगा हो भूका हो
मोटा हो सूखा हो
शुन्य प्रतिकार हो
अपनी सरकार हो।
अंधे कवियों ने लिखी महान कविताएं
बहरे बीथोवेन ने सिम्फनी
कटे पैर लोग चढ़ जाते हैं पहाड़।
नागरिक चाहते हैं
राष्ट्र भक्त होना।
चाहते हैं,
न बदले कुछ भी
रटे हैं, विकल्पहीनता।
महान राष्ट्र यूं जन्म ले रहा है।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...