Friday, July 24, 2020

1.
मगन हैं हम,
जयगान है।
जय है जयकारा है
सभा का वितान है।
2.
मसीहा धृतराष्ट्र,
हम, गांधारी।
नवाचार- बन्द आंख
अन्धता संचारी।

फरेब से उसके, तू निकल बाहर

कविता!
सुन, तू मत ढो, अपने कंधों पर उसे।
जो झूठ है,
मत गवाही दे उसकी
सपने झूठ के, शुभ नहीं।
छंद के अपने नियमों तले
मज़बूर नहीं तू ।
फरेब से उसके, तू निकल बाहर,
और मुझे भी खींच इस कूप से परे।
कविता !
साहस ले और लिख अपनी जगह जनता।।

उसका डर निजी है, हम सबका, सार्वजनिक।

1.
उसका डर निजी है,
हम सबका, सार्वजनिक।
2.
वह डरता है स्व के लिए।
हम डरने लगते हैं,
हम सब के लिए,
इस देश के लिए,
इस समाज के लिए।
लगता है,
हम डरते हैं हमारे लिए।
सच यह कि,
हम सब डरते हैं, उसी के लिए।
3.
मसीहा, डरता है, सामान्य हो जाने से।
4.
हम भेडें, डरते हैं, उसके सामान्य हो जाने से।

हम उसकी भेड़ें

1.
मैं मसीहा हूँ
खुले आम कहा उसने
हम बन गए, उसकी भेड़ें।
2.
पता लगा, वह मदारी है
मसरूफ रहे, हम खेल में ।
3.
बचपना, हमारा।
4.
आज तक वह मसीहा है
हम उसकी भेड़ें।

कितना बड़ा फ्राड है, तेरा हीरो होना।

1.
होम्स,
शरलॉक होम्स।
एक शरलॉक होम्स, होता अगर आज भी,
बता देता तू क्या है
डिड्यूस करके बता देता
कितना बड़ा फ्राड है,
तेरा हीरो होना।
और हम कह उठते, हाँ, यह तो, सच ही है।
2.
तू खुदा है,
तेरी एक खुदाई है
बड़ी मेहनत से तूने माया रचाई है।
जानते हैं थोड़ा तो, तूझे जानने वाले भी
तूझे खुदा मानने वाले
तुझे खुदा बना
उनका भी चलता व्यापार है
तू खुदा है

झूठ पर ही, अब ठिठरे

1.
कुछ झिझक से ही, कहा उसने, अर्ध सत्य।
फिर, बिन झिझक, असत्य।
किंचित झिझक से सुना पहले,
झूठ पर ही, अब ठिठरे।
2.
उसे पता है, हमे क्या सुनना,
हमे पता है वही, कहता मन की।
सिवा उसके, नहीं सुनते।
3.
झूठ उसका ही हमारा सच
हमे पता भी नहीं, सत्य अन्विज्ञ, नहीं।
4.
उसे नहीं, हमे उसकी जरूरत।
हमे चाहिए वही, फिर फिर वही।

शब्द नहीं सूझ रहा

पहली बार दिल टूटने से भी ज्यादा,
ज्यादा, संतान को पीड़ा में देख उठने वाली पीड़ा से, इतना कि शब्द नहीं सूझ रहा
चन्द रोटियां बिखरी रेल लाइन पर,
इतना दर्द दे रही
जैसे मर गए हों।
मर जाने पर खुद के
हो उठता होगा, ऐसा दर्द।

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...