Sunday, December 4, 2011

जानना चाहता नहीं............

जानना चाहता नहीं,

कई सवाल
उठते, गिरते
गिराते उठाते मुझको.

जानना चाहता नहीं,
मेरे शब्द, आवाज़; मेरे लिए या खिलाफ मेरे

यादें,
वजूद पर भारी; प्रत्याशा में गढ़ी यादें

जानना चाहता नहीं,
वजूद या गढ़ी यादों में ज़रूरी क्या है....  

3 comments:

  1. चंद पंक्तिया और बेहतरीन अभिव्यक्ति.....

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  2. मेरे विचार से....

    यादें गढ़ी नहीं जा सकतीं।
    जानना असंभव है कि यादों में और वजूद में कौन जरूरी है।

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  3. बहुत सुन्दर...

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