Thursday, December 22, 2011

विदा हैदराबाद..............

१.
सुना तुमने,
मुझे हंसते,
मुस्कान आदत केवल.

हर एक बात
बिपरीत जाती हो,
मेरा बचाव हँसी..

२.

हैदराबाद,
लौटा दिया/ हाथ खाली

कुछेक दोस्त दिए,
 दिल को जोड़े.....

३.

चीरता सन्नाटा
अपनी साँसों में घुटा अटका
ज़िन्दगी रोके थी अब तक.

हैदराबाद, 
भरी तुमने फेफड़ों में गर्मी,
मिली वापस 
हंसी मुझको

शुक्रिया तेरा  !!!!!!!

4 comments:

  1. अलविदा कहने का खुबसूरत अंदाज़, वाह... बहुत सुन्दर रचना.

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  2. hmm...achha hai...aapne kam shabdon k zariye ek seedha saral expression diya hai..

    mujhe ye lines sabse jyada achhi lagi..."jab har baat vipreet jaati ho..mera bachaav hansi.."

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  3. aahuti jee.......... manish aur bhavana......... bahut bahut shukriya......... aap log to life time readership subscription wale ho gaye hain...... thank you so much......... bahut nahut shukriya........

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