Friday, July 31, 2020

नींद से बोझिल पलकों को
रोके रखना,
मूंदते ही जिनके ख्वाब तैर उठें,
साथ पसर जाए सरगम।
पलकों को रोक
पढ़ना नाम एक बार फिर,
इस तरह,
तुम जवाब देती हो।
2.
सवाल ज़िन्दगी करती है,
बिना थके बिना रुके,
मैं चुप
तुम जवाब देती हो।
3.
तुम्हारे जब सवाल उठते हैं,
ज़िन्दगी रह जाती है मौन।

Thursday, July 30, 2020

 बार बार दूर तक दिखता है पानी
नदी फैल गई हो
या
सागर निकल आया हो बाहर।

अंत आता सा लगता है अपना
फिर दिखने लगता है
मस्तूल एक नाव का।

क्या तुम भी हो
लपेटे एक सफेदी
यह पूछते,
मोगरे की खुश्बू फैल जाती है।

क्या पास ही हो तुम।
1.
नदी की लहर पर,
सागर पर,
तैरता, एक चुम्बन पहुंचे तुम तक।

तमाम उम्र मैं करता रहा कम्पन।

2.

पलक के कोनों को छूकर
झपकने भर में
तुम्हारी आँखों में रख आया सपना

देखते जिसको काटी है उम्र सारी।

3.
तुम्हारे आने तक
रहेगी धरती
खिलेंगे फूल गाएंगे पक्षी।

बाद उसके न रहेगा होश हमें।
दिन का विलोप हुआ,
रात उदास हुई।
अंधेरे में,
मेरे गीतों को सुना, सराहा तुमने।
मन भर जाने से पहले,
छेड़ देता हूँ मैं नए स्वर
नया खेल दर खेल नया
नए नए नामों से खेल नया।

जगमगाते हैं लैम्प पोस्ट नारंगी,
स्टूडियो से छन
आती है तुम्हारे लिए जगमाती लहरें,
बरसात के कीड़ों सम
तुम्हे पसन्द हैं मेरे लैम्प पोस्ट।
अच्छा लगता है मुझे, तेरा बहल जाना।

रात कुछ और उदास हो जब,
मैं रचता हूँ खेल कोई
तुम्हारे लिए, प्रिय जनता।
मैं मसीहा हूँ, अंधेरी उदास रातों का।

Tuesday, July 28, 2020

हमारी हार के चर्चों से भर लिया दामन,
जीत के बाद भी मशरूफ हो हराने में।
तुम्हारे तौर तरीके तो कुछ निराले हैं
हम ही हम हैं अब भी, तेरे फ़साने में।
हमारी हार के मानी खत्म हुए,
वायदे तेरे, निकले सभी नकली।
बल, साहस, उद्यम, रास्ते नए
झूठ तेरे, तेरी क्रूर हंसी बस असली।
बेशर्म स्थापनाओं के, तुम शहंशाह हो,
मसीहा, बन्द करो लचर आवारापन।
करो कुछ वह भी, जो करने आए हो,
दो अभागे देश को कुछ अपनापन।

Monday, July 27, 2020

1.
खुदा था, खुदाई थी
कारिंदा बन वो आए फिर,
राजे महाराजे,
हमने शीश नवाया।
तुम हो अभी,
हमारा मसीहा, खुदा का कारिंदा
किसी गलती किसी आक्षेप से परे।

2.
तुम हो, तुम्हारा सर्कस है
तमाशबीन भी, हम शामिल हैं।
खेल रहे हो तुम
जिससे, वह हम हैं। हम देश हैं।

3.
बिना अंत की हैं, यह कविताएं
तुम्हारे लिए रचित,यह प्रार्थनाएं
मसीहा हो तुम, तुम अनंत हो,
हम प्रजा हैं
भोग पाते हैं, केवल अपना अंत।

Sunday, July 26, 2020

तुम मसीहा हो,
चुना तुमने मज़बूत होना।

हम देश हैं
हमने चुना है तुम्हे
देश का मज़बूत नेता।

हमारे लिए आसान था यह,
बनस्पति
चुनना मज़बूत देश और तुम्हे नेता।

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...