तमाशा
गुजर रहे वक़्त का नाम है, तमाशा।
गटर
सार्वजनिक जीवन है, गटर।
खेल
तमाम रियाया संग हो रहा है, खेल।
जेल
बिना चहारदीवारी बिन दरवाज़ा जहालत की खुली जेल।
नेता
कौन ?
देश
बेहतर है मौन।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...