Tuesday, June 11, 2013

अंत हुआ 
इसतरह 
अनंत का ॥ 

आशा ने दामन छोड़ा 
ख़त्म हुई 
निराशा ॥ 

नहीं  पता 
पर 
अभाव है, शून्य 
या पूर्णता मेरी ॥. 
ख़त्म हो जाता है / सचमुच,सबकुछ  / रह जाता है, / फिर भी मैं  ॥  परे, सन्नाटे के / नहीं आवाज़ / कोई / न ख्वाब,न क़त्ल उनका / खडा मिलता है / आतप्त  मैं  ॥ 

Monday, June 10, 2013

बुनता रहा मैं 
गीत । 

मेरे अनजान 
ही, 
चखते रहे 
मुझको 
गीत मेरे । 

चीरा मुझको 
मुझी से, पेट भरा 
रक्तस्नान कर 
शुद्ध हुए 
गीते मेरे । 

उन्ही शब्दों ने जिया मुझको 
जिनकी चौखट 
आसरा थी मेरी । 

प्रेम 
निर्लज्ज 
घृणा 
लज्जा । 

तार तार 
खुली, बुनाई 
मेरी ॥ 

Saturday, June 8, 2013

मेरा स्थिरपन  
नहीं  विस्मय  
चकित करता है 
मुझ तक पहुच जाना तेरा      

Wednesday, June 5, 2013

मैं हुआ  ठंढा 
लावा अन्दर नहीं जमता 
बादलों के कई घेरे 
मुझको घेरे 
मन फिर भी दहकता 

Sunday, May 5, 2013

इंतज़ार

इंतज़ार 
उस  एक पल का
बंद कर दोगे तुम,
प्यार करना।

मुक्त हो जाओगे 
तुम,
बंद कर दोगे 
नफरत भी।

Sunday, April 21, 2013

एक दिन और

१. 

एक दिन और 
पुनः एक दिन 

ज़िन्दगी खींच रहा।

एक दिन और, 
कोई तोहमत न आए तुझपर।

२. 

तुम्हे शिकायत है,
चाल चलन से मेरे।

मुझे पता है,
तुम्हे मेरी आदत नहीं।

३. 

इंतज़ार है मुझको 
तेरे लिए, या तुझको भी

बंद कर दोगे तुम 
प्यार मुझसे।

मुक्त मुझसे, मिले
तुझे धरती, आकाश तेरा। 



मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...