Wednesday, June 5, 2013

मैं हुआ  ठंढा 
लावा अन्दर नहीं जमता 
बादलों के कई घेरे 
मुझको घेरे 
मन फिर भी दहकता 

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मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...