अंत हुआ
इसतरह
अनंत का ॥
आशा ने दामन छोड़ा
ख़त्म हुई
निराशा ॥
नहीं पता
पर
अभाव है, शून्य
या पूर्णता मेरी ॥.
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
very nice
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