समय नहीं चक्रीय
वर्तमान;
भूत भी
चंद खंडो में कटा
रेखीय टुकड़ा है
समय
स्थगित है
कटे किनारों के मध्य
कत्ल हो गया है उम्र का
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...