गम
केवल,
यादों का होना.
ख़ुशी
याद की मुहताज नहीं.
ज़िन्दगी
गुज़रती
याद की ट्रेन तरह
यादों का होना
गम
केवल .
यादों का होना
गम
केवल .
कितना जानें कितना मानें ख़ुद को कितना पहचानें । कहाँ रेफ है सेफ़ कहाँ है बीता कितना बचा कहाँ है कितना कच्चा-सड़ा हुआ है मौत मौत है ज...
Kuchh adhuri si lagi...
ReplyDeletePar bahut khubsurat...
ख़ुशी
ReplyDeleteयाद की मुहताज नहीं.....yaadein haesha khushi lekar aayein aisa zaroori nahi..