Friday, May 20, 2011

मैं...

१.
ताड़ की झाड़
आकाश मेरा;
ताड़ पर ही अटका
न गिरा न चढ़ा

धरती औ आकाश
दोनों नहीं मेरे !

२.
किरकिर कंकड़
अनाम अरूप
अव्यवस्थित
ठोस !
स्वीकार्य/मैं/नहीं

तरल जो कभी;
केवल चक्षु कोनो पर फंसे
जल सा
न आंसू
न हया

तरल जो कभी;
अनाद्रित
मैं!




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