Thursday, May 5, 2011

क्यूँ कर/तुम्हे यकीं आये

क्यूँ कर 
तुम्हे यकीं आये
तुमने नहीं देखा 
स्याह-सफ़ेद/ रंगहीन कैनवास

हाँ या ना में नहीं सिमटी 
तेरी दुनिया !

कांच  सब कुछ है 
पारदर्शी के सिवा
झूठ नहीं सच का विलोम
प्रतिसच सच्चाई है 
तुम्हारी !

क्यूँ कर 
तुम्हे यकीं आये
कोई है 
नापता जो 
ब्रह्मांड दित्व में केवल.



No comments:

Post a Comment