Saturday, July 25, 2020

1.
मौन भी, वाचाल भी
एक मेव हित उसका,
सत्ता।
अखण्ड सत्ता।

2.
निपट अकेले की,
चाहत का अंत नहीं।
अश्मेध, उसका यज्ञ,
हम, सहर्ष समिधा।

3.
सीने में ख़ंजर है,
ख़ंजर उसका, अपना सीना।
उसके निमित्त है, देश! तेरा जीना।

Friday, July 24, 2020

1.
साथ होते, तो होते जुदा,
तुम नहीं, तो तुम-सा हो गए
खड़े रहे यहीं,
रुके तो फिर कहीं नहीं गए।

2.
याद को बांध लिया,
भूल गए खुद को। 

3.
अब नहीं, कहीं अँधेरा
अब नहीं अकेलापन। 

1.
नहीं रुकते,
चलते जाते हैं।
आता है उन्हें, सतत,
चलना चाल।
2.
मसीहा, चलता है,
हम अनुगामी हैं।
करता जाता है, संकरा
वह, अपना जाल।
3.
हमारा सीना है,
ख़ंजर तेरा।
गुनाह खुद ही किया,
तेरा कमाल।
1.
सीख रहे लिखना,
न केवल, तुम।
लिख रहा मैं भी, खुद को।
आखिरी शब्द गढ़े मेरे,
बुन रहे, तुम को-मुझको।
2.
मुझे पता है,
दुनिया तुम्हारे अनुकूल नहीं
बेहतर बनाएं, आओ इसे।
3.
डर लगे जो कभी अकेले, याद रखना
जीन, कोड मात्र नहीं,
संचित सम्पदा है,
मुझसे, तुम तक।
4.
मानव जाति का अगला मिशन हो,
तुम,
तुम्हारा जन्मदिन, एक और कदम।।
5.
मेरे बेटे, जन्मदिन मुबारक हो।
1.
तुम कहती हो,
याद स्पर्श है, प्रियतम की।
तुम कहती हो, तो सच होगा।
2.
तुम्हारे कहने से इश्क़ खिलता है,
महकता है, याद का कोना।
नहीं मिटता लेकिन, तेरा न होना।
3.
तुम्हारे रहने से, रहती है लौ अडिग
बरसते रहते हैं हरसिंगार।
तेरे रहने में, रहता है तेरा छूना।
भोंपुओं की राय है,
शासन, गाय है।
पूज्य दरबारी हैं,
दान के अधिकारी हैं।
मसीहा की आन है,
चढ़े तीर कमान हैं।
तोप को हराएंगे,
दूर तक,भगाएंगे।
सेवा का मौका है,
आउट भी चौका है।
मसीहा, महान है
सर्व शक्तिमान है।
पावन पवित्र है,
साक्षात गंगा है।
ऐसा है पहली बार,
सब कुछ चंगा है।
शांति शांति शांति.........

मसीहा, तुम अजेय हो

1.
मसीहा, तुम अजेय हो,
तुम ही, देव हो।
तुम कृष्ण, हम मीरा,
सब कोयला, तुम हीरा।
2.
पता तुम्हे भी है, अंधकार काल है,
देश पर घुमड़ता, आफत अकाल है।
अनवरत खेल है, इंतेज़ाम पूरा
तुम हो मदारी, हम हैं जमूरा।
3.
तेज़ है समय चक्र, अद्भुत काल है
भक्ति, चारण, रीति का, मिश्रण कमाल है।
शक्तिमान, सिद्ध तू एकमेव नायक है,
अंधकार काल के, हम सब गायक हैं।

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...