Sunday, April 21, 2019

तुम हो,
और राजा है।
2
दिखता नहीं मैं,
न तुमको न राजा को।
3
अकालग्रस्त हूँ मैं
न भूलूंगा पर तुम्हे, न बख्सुङ्गा राजा को।
4
प्यार मिले तुमको, आह राजा को।
5
जाता हूँ अब।

Tuesday, April 16, 2019


१.
वापस, लौट आया
कहीं नहीं गया फिर
रह गया जड़
न ली सांस कभी फिर।

लौट आया खुद के पास
लौट आया, तुम्हारे दर से।

२.
दूर हुआ तुमसे,
न जिया न मरा।

३.
तुम दूर हुए नहीं,
मैं पास नहीं आया
उधार ली ज़िन्दगी, वही पहने रहा।

Saturday, April 13, 2019

कई रात बाद लौटा,
कई दिन विलुप्त हो गए
लौटा तो साथ पंजर था, मुझ-सा, मुझसे बड़ा ही किंचित।
साथ मेरे, था मुझ-सा कुछ मरा हुआ सा।

समझ नहीं आता नहीं
मरा मैं लौटा या मौत, ही लौट आया है मेरे बदले

दिन है या रात
समझ नहीं आता।

Tuesday, April 9, 2019

उम्र के साथ गिन रहा हूँ, गिनती

तो क्या करें, पता है, 
न तुम पढ़ते हो
न मैं लिखता हूँ
अब ऐसा कुछ भी नही करते 
जो साथ कभी करते थे
तो क्या करें,
इस ऊब का, जो पहले तो न थी.
उम्र के साथ गिन रहा हूँ, गिनती
मन ही मन बुदबुदा रहा हूँ पहाड़े
अतिरिक्त इसके क्या करें,
इस नई ऊब का.

ख्वाब जितने भी, कत्ल हुए.

1.
जब लिखा झूठ,
पढ़ा प्यार।
और इस तरह उम्र को गच्चा दिया।
2.
जब कहा सच,
सो गया।
ख्वाब जितने भी, कत्ल हुए।
3.
दोष दिया,
मर गया।
साथ जोहता रहा।

चाँद आज़ाद हो जाता है।

1.
कटोरे भर हंसी तेरी,
चुम लेता हूँ
चाँद आज़ाद हो जाता है।
भर आती है रौशनी
स्याह ज़िन्दगी के कोठरों में।
2.
औंधे पारिजात पर रख पाँव,
अलसुबह छोड़ जाती हो
रात खत्म नहीं होती।
मर जाता है दिन
स्थिर हो जाती है, ज़िन्दगी की डेवढ़ी।

व्यतीत हो रहे हम।

1.
मौन घट रहा,
व्यतीत हो रहे हम।
2.
याद रहता नहीं कुछ,
बीत जाता है, प्यार।
3.
कुछ सिमटी, कुछ सिकुड़ी
रहती हैं मगर, चले जाने के बाद।

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...