Tuesday, April 9, 2019

उम्र के साथ गिन रहा हूँ, गिनती

तो क्या करें, पता है, 
न तुम पढ़ते हो
न मैं लिखता हूँ
अब ऐसा कुछ भी नही करते 
जो साथ कभी करते थे
तो क्या करें,
इस ऊब का, जो पहले तो न थी.
उम्र के साथ गिन रहा हूँ, गिनती
मन ही मन बुदबुदा रहा हूँ पहाड़े
अतिरिक्त इसके क्या करें,
इस नई ऊब का.

ख्वाब जितने भी, कत्ल हुए.

1.
जब लिखा झूठ,
पढ़ा प्यार।
और इस तरह उम्र को गच्चा दिया।
2.
जब कहा सच,
सो गया।
ख्वाब जितने भी, कत्ल हुए।
3.
दोष दिया,
मर गया।
साथ जोहता रहा।

चाँद आज़ाद हो जाता है।

1.
कटोरे भर हंसी तेरी,
चुम लेता हूँ
चाँद आज़ाद हो जाता है।
भर आती है रौशनी
स्याह ज़िन्दगी के कोठरों में।
2.
औंधे पारिजात पर रख पाँव,
अलसुबह छोड़ जाती हो
रात खत्म नहीं होती।
मर जाता है दिन
स्थिर हो जाती है, ज़िन्दगी की डेवढ़ी।

व्यतीत हो रहे हम।

1.
मौन घट रहा,
व्यतीत हो रहे हम।
2.
याद रहता नहीं कुछ,
बीत जाता है, प्यार।
3.
कुछ सिमटी, कुछ सिकुड़ी
रहती हैं मगर, चले जाने के बाद।

गवाही।

१.
चुप्पी !
२.
गवाही।
३.
टूट गया सब
और आवाज़ न हुई
कोई बात नहीं
नई कोई बात नहीं हुई।
तुम चले गए
और रात हुई।

प्रेम का कायर होना.

1.
दुख है, प्रेम।
2.
दुख है, कायरता।
3.
बड़ा दुख है, प्रेम का कायर होना।

चुप रहो, बच निकलो।

घुप अंधेरा।
गहन मौन।
एक लंबी रात का रात का सफर है
एक मदारी है
एक जम्हूरा
तमाशबीन कौम है।
चुप रहो,
बच निकलो।

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...