Sunday, September 14, 2014

ज़िन्दगी बोर है, तुम्हारे बिना।

१. 

लम्बी बरसात 
बोर होती है, बिना चमक 
ज़िन्दगी बोर है, तुम्हारे बिना। 

२. 

अनवरत बरसात 
भिगो देती है धरती, धरती की हरयाली 
मन और सूख जाता, तुम्हारे बिना। 

३. 

बरसात कभी कभी 
दरकचा देती है, घर की दीवारें 
नींव ढहती मेरी, तुम्हारे बिना। 









Saturday, September 13, 2014

मैं चाहता हूँ

१. 

मैं चाहता हूँ 
अंत न हो अनंत का 
अंत के बाद भी बचा रहे कुछ तो। 
मैं चाहता हूँ 
ब्रह्माण्डांत, बसे एक और दुनिया। 

२. 

मैं चाहता हूँ 
मृत्यु के साथ ख़त्म हो जीवन
मौत बार बार, न हो किसी के लिए। 
मैं चाहता हूँ
ज़िंदा रहने का हक़ हो, मरने तक। 

३. 

मैं चाहता हूँ
उजाला रहे, दिन के अस्तित्व परे 
काल गड़ना तक न सिमटे सूरज। 
मैं चाहता हूँ 
रात दिन न मुहताज हो कैलेंडर के।  

Friday, August 22, 2014

वक़्त

1.

वक़्त का एक मोड़ ऐसा भी 
परे जिसके, 

इंतज़ार बचता है वक़्त ख़त्म होने का। 


2.


न अनादि है न अनंत समय का विस्तार। 
भ्रम भर,
ख़त्म हो जाता है, शुरुआत के अनन्तर ही। 



3.

(अ)काल नहीं धरता रूप, भूत या वर्तमान।

भविष्यत् काल,
कुछ नहीं, बस मन की उड़ान। 

Wednesday, August 20, 2014

मैं चाहता हूँ

1.

मैं चाहता हूँ 
ख्वाब निर्जीव न हों,
उठान हो निर्भीक। 
मैं चाहता हूँ 
लौट आये बचपन। 

२. 

मैं चाहता हूँ 
लम्बाई बढ़े दिन की
चटक चमक हो उजाले की। 
मैं चाहता हूँ 
अँधेरे का दमन। 


3.


मैं चाहता हूँ 
पी सकूँ धुंआ, गर्द  कालिख 
समा जाए मुझी में जहर। 
मैं चाहता हूँ 
साफ़ हवा बहे अब से। 

Sunday, August 10, 2014

न कह सका अपनी, न सुना तेरी

न कह सका अपनी, न सुना तेरी
ज़िन्दगी, हम रह गये अपरिचित ही।

साथ होने से ही, हैं हम दोनों
अजीब है नहीं, हमारा होना ही।

चन्द सांसें दी हैं तुमने मुझको
एक तुमको मिला मुझसे, मायना ही।

नहीं साम्य कहीं, मध्य हम दोनों
तुम घटते गए, मैं बढ़ा ही। 












Saturday, August 2, 2014

बीत रहा मै...

 १. 

व्यर्थ,
या अन्यथा
बीत रहा मै। 

२. 

भरा पूरा,
ठसक ठसक 
रीत रहा मैं। 

३.

चलती नहीं,
ख़त्म होती ज़िन्दगी
टीस रहा मैं।  








Tuesday, July 22, 2014

अशेष नहीं, समय भी....

१.

अशेष नहीं, समय भी।  
ख़त्म हो,
वक़्त भी।

२.

न  पहले कुछ। 
न  बाद कुछ
मुझ तक, सिमटा समय।

३.

घूम फिर वहीं लौटे। 
नहीं कुछ और 
ज़िन्दगी का मक़सद, ज़िन्दगी।  






मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...