Wednesday, November 28, 2012

1.

इक गुज़ारिश है,
सिरिअसली न लिया करो, मुझको।
कल को दोष मढ़ दोगे सब, मुझपर।  

2.

इक सलाह है,
ज्यादा सहेजा न करो, रिश्तों को।
बिखरना ही नियति, रिश्तों की।

3.

इक आदेश है,
देखना न समझना, मुझको।
कसूरवार कोई नहीं, मेरे लिए।    

      

कुछ इस तरह

1.

कुछ इस तरह,
बदला हो तेरा,
छोड़ दे तू 
नाराज़ होना।

2.

कुछ इस तरह,
प्यार करे तू,
भूल जाये तू,
जिसे प्यार करे।

3.

कुछ इस तरह,
बंटवारा खुशियाँ का,
चहरे तक  कभी, 
न पहुंचे गम तेरे। 
   

Friday, November 23, 2012

अबूझ ही हम अच्छे

1.

समझाना, तुम्हे लगता मुश्किल;
समझना, असंभव मुझको।
अबूझ ही हम अच्छे।

2.

कीमत जाती है, तेरे हिस्से से;
चुनता मैं, दर्द रवां करने के तरीके।
खरीद-भुगतान को इस तरह बांटा हमने।

3.

 किसी के जिम्मे न आए, तोहमत,
 दुसरे का कष्ट, न हो ज्यादा।
 इस कदर जिम्मेदारी, ढोते हम।      
  

 
   

डूबती कश्ती में, सवार हम

1.

मेजपोश, बिछी मेज़ पर
गर्द की पर्त बिछी, मेजपोश।
रिश्ते बिछा, सो गए हम।  

2.

जलावन की लकड़ी, घी  तली,
मज़े से जलते रहे।
ज़िन्दगी आज असली रंग में।

3.

अँधेरे औ उजाले के बीच,
डूब जातें हैं, ख्वाब जहां।
डूबती कश्ती में, सवार हम।







    

Thursday, November 22, 2012

आदि से अनंत तक, हम दोनों।

1.

उदासी रोती मुझ पर,
उदासी पर रोता मैं।
बन  गए, हम दोनों साथी।

 2.

चेहरे को ढक देता मैं,
नाम मिटा देते तुम।
हो गए, अनाम हम दोनों।

 3.

मेरा अंत नहीं होता,
तुम होते नहीं, दुबारा।
आदि से अनंत तक, हम दोनों।



   




Tuesday, November 20, 2012

मुझे आदत है, तेरे ठोकर की।

1.

समतल ज़मीन पर,
इक टुकड़ा पत्थर।
मुझे आदत है, तेरे ठोकर की।

2.

मिलना, मिलते रहना
मरने में मज़ा आ जाता है।

3.

डर कभी न था,
ज़िन्दगी तुझसे जुदा होने का।
अब प्यार भी नहीं करता, तुमको।





   




Thursday, November 8, 2012

मिलते हम


1.

मिलते हम,
तेज़ रोशनी, घुप्प अँधेरा 
दीख पड़ता नहीं, कुछ।
रोशनी,
छीन लेती 
तुमको, मुझसे।

2.

निर्वात, भारहीन 
मिलते मैं, तुम।
भार छीन लेता
तुमसे, मैं 
तुम, मुझसे 

3.

उंचाई 
अलग करती हमको,
गिरने का डर।
मुक्त, गिरते हुए,
मिलते हम।

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...