Tuesday, October 16, 2012

काटता है वक़्त

मनहूस मई  रात
खुद को मरा पाया उसने
हर रोज़,झखझोर खुद को देख लेता है
और रोज़ ही,
खुद को मरा पाता है,
काटता है वक़्त,
मौत को गिनते, बार बार  मारता है
हर बार ही, खुद को .

Thursday, October 4, 2012

झाड झंखाड़ स्वप्न एक .....01

उजाला बढ़ गया 
कल नींद साथ लाई,उजाला  
घनघोर उजाला
चमकदार, सफ़ेद, उजला, उजाला।
तुम पर साथ आ गए जैसे 
तुम आ ही गए साथ पर 
'आ गए जैसे' जैसी बात नहीं 
जैसे भरम हो मेरा 
तुम्हारे साथ ही आई एक परछाई, जैसे
 'जैसे ' कहना वाजिब है 
[न मेरे भरम का पता पक्का , न तेरे साथ की परछाई का ]
जैसे भरम हो मेरा ,तुम्हारे साथ ही,आई एक परछाई,जैसे 
लग पड़ी तुम गले मेरे,

और मै जलने लगा 

जलन से मेरे , जल न पाई परछाई 
अपने खुद से ढक रखा
छुपा रखा खुद से भी तुमने, परछाई 

चिपक  गई है तुमसे परछाई
नहीं कोई काम, मुझे परछाई से 
तुम  भी तो कहते हो, नहीं कोई काम तुमको, परछाई से 
पता नहीं मुझको
जगता कि सोता हूँ, खुद को ही छलता हूँ
देख देख खुद को ही,
जलता  दहकता हूँ
देख देख खुद को ही, हँसता हूँ,  हँसता हूँ 
अट्टहास 
हँसता हूँ 
हहाकर हँसता हूँ 
जलते हुए मुरख पर हंस कर बरसता हूँ 
हा हा हा हँसता हूँ 
झिम झिम बरसता हूँ,
भीगता नहीं हूँ 
तुम भीगते हो
नहीं भीगती है परछाई 

जलता बरसता हूँ 
हँसता हूँ 
अट्टहास 
    

Tuesday, August 28, 2012

डरना बेतरह, खुद के ख़त्म होने का 
और ख़त्म हो जाना फिर /
डर बेहतर था, 
खुद के ख़त्म हो जाने से 

Sunday, January 22, 2012

मन चाहता है

1.

 मन चाहता है
 नीँद, भर रात 
 ख्वाब मेँ तुम । 
मन चाहता है 
 दिन भर, तुम केवल ॥ 

2. 

मन चाहता है 
 इन्द्रधनुष 
 चमक का, तेरी 
 रंग ओ गंध, तेरे होने के 
 मन चाहता है 
 इर्द-गिर्द तेरे, मैँ लट्टू ॥


3. 

मन चाहता है  
ओरहीन नभ, उड़ान का मेरे 
जा जुड़े, छोर से तेरे  
मन चाहता है 
 उड़ू मैँ, लट तेरी ॥

Sunday, January 1, 2012

कार, मकान, प्रेमी


कई कई चाँद, सितारे अनेकानेक    
आँगन ऐसे, 
अक्सर अब तो।

फूल की गंध मिश्रित ,
कद्रदान,
 रंग कई  

शमाँ  औ परवाने 
भंवरा औ कलियाँ  
उपमान पुराने ये, 
शाश्वत / मतलब अपने .

एक शमा, परवाने कई 
भंवरा एक, कलियाँ कई...

ज्यादा और ज्यादा 
चाहिए और ज्यादा 
कार, मकान, प्रेमी 



  
  




Saturday, December 31, 2011

क्रोध आता है...

1.

क्षोभ होता है...

धकेल देता जब 
इन ढूहों से,कोई

गिराते, नहीं शिकवा !
  
ज़रा  उठान तक जाने देते,
गिरता भी, आसमान दिखता तो भला.

लौटता, उड़ते उड़ते...     

2.


क्रोध की परिणति है, रूदन.
बेबसी औ' क्रोध
करूं क्या इनका..


३.


ज़िन्दगी चलती है
आक्सीजन है हंसी.. 

   

सालान्त, बख्से मुझको अतीत से अपने.

लोग बाग
सवाल बना,जवाब सुझाते हैं मुझे.

शिक़वे भूल, गिले मिटाने का सुझाव,
सवाल, सालान्त को करें यादगार. 

नहीं याद,
नाटक औ पात्र 
याद नहीं अभिनव,

समय की तह या गर्त 
पनाह दिए हो भी गर,

भूलने, मिटानें में 
ताज़ा क्यूँ करूँ ज़ख्म    

सालान्त, बख्से मुझको 
अतीत से अपने. 
            

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...