डर, अस्तित्व के खोने का...बहुत दिन बाद कुछ अच्छा पढने को मिला
शुक्रिया मनीष
सुन्दर पोस्ट, बधाई. कृपया मेरी नवीनतम पोस्ट पर पधारने का कष्ट करें .
शुक्ल जी धन्यवाद, टिप्पड़ी और आमंत्रण दोनों के लिए
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
डर, अस्तित्व के खोने का...
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कृपया मेरी नवीनतम पोस्ट पर पधारने का कष्ट करें .
शुक्ल जी धन्यवाद, टिप्पड़ी और आमंत्रण दोनों के लिए
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