Tuesday, August 28, 2012

डरना बेतरह, खुद के ख़त्म होने का 
और ख़त्म हो जाना फिर /
डर बेहतर था, 
खुद के ख़त्म हो जाने से 

4 comments:

  1. डर, अस्तित्व के खोने का...
    बहुत दिन बाद कुछ अच्छा पढने को मिला

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  2. शुक्रिया मनीष

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  3. सुन्दर पोस्ट, बधाई.

    कृपया मेरी नवीनतम पोस्ट पर पधारने का कष्ट करें .

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    1. शुक्ल जी धन्यवाद, टिप्पड़ी और आमंत्रण दोनों के लिए

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