Friday, December 30, 2011

१.

दीवाल सा कुछ,
भरभरा,निरंतर रोके हुए!
खुद सपने अपने   
ले ले भागूं जब.

टूट रहे भ्रम मेरे
याकि,
सपनो में दगा, ख्वाब देते जाते......  

२.

मन के किनारों पर 
अक्सर,
दुःख के सीपी चुनते 
हंसी की चंद फुहारें
मोती बन लुप्त होते 

ख्वाब मेरे अपने,
सहते नहीं मनमानी मेरी..  
 

Thursday, December 22, 2011

सर्दी, इस मौसम......

१.
 धुप या न होना इसका,
उदास कर जाता है.
मन टटोलने लगता/ जगह खाली पासंग......

२.

ऊंचे बित्ता भर/
birawe    
फूटी बाली

मन करता है/
रूक जाऊं/
इन्हें पकने तक...

३.

रात अकेली, नीरव/
शोर केवल कुहरे का

मन करता है/
लपेटे हुए धुंध/
सोते रहें गंगा तीरे...

४.

सर्दी/ इस मौसम.
न केवल ठंढक.

सर्द, इसमौसम है/
मुरझाना मेरा.......

मैं........

१.
तमाम बातों का,
एकाध सिरा

कभी कभी पकड़ आता..........

समझ आता
अजनबी मैं  कितना /
रहने और जीने के तमाम नुस्खे.......
सुनता, जब जब
उदासी पैठती, रह रह
होता जाता हूँ कुछ और अकेला......

२.

कोना,
सावंली छाया का,
छू गयी मुझको.

दाग मैं लिए फिरता .

अँधेरी रात
अँधेरा काला
ये दुनिया रहती जिसमे
सह नहीं पाती मुझको.

नहीं चाहिए रौशनी इसको,
मुझे बर्दास्त नहीं, दाग मेरा.....

३.

किसी के रूकने तक,
मेरे लिए:
मैं नज़र आता नहीं,

मैं नज़र नहीं आता
रुकता नहीं, कोई,
मेरे लिए !!!!!! 




विदा हैदराबाद..............

१.
सुना तुमने,
मुझे हंसते,
मुस्कान आदत केवल.

हर एक बात
बिपरीत जाती हो,
मेरा बचाव हँसी..

२.

हैदराबाद,
लौटा दिया/ हाथ खाली

कुछेक दोस्त दिए,
 दिल को जोड़े.....

३.

चीरता सन्नाटा
अपनी साँसों में घुटा अटका
ज़िन्दगी रोके थी अब तक.

हैदराबाद, 
भरी तुमने फेफड़ों में गर्मी,
मिली वापस 
हंसी मुझको

शुक्रिया तेरा  !!!!!!!

Sunday, December 4, 2011

जानना चाहता नहीं............

जानना चाहता नहीं,

कई सवाल
उठते, गिरते
गिराते उठाते मुझको.

जानना चाहता नहीं,
मेरे शब्द, आवाज़; मेरे लिए या खिलाफ मेरे

यादें,
वजूद पर भारी; प्रत्याशा में गढ़ी यादें

जानना चाहता नहीं,
वजूद या गढ़ी यादों में ज़रूरी क्या है....  

Monday, October 24, 2011

गाँव.................... village visit..86th F.C.


झांक, 
ट्रेन की खिड़की,
खेत समतल
हरियाली कहीं बिखरी,
नंग धडंग बच्चे,
धुल से बीन कंकर
फेंकते,
हँसते, मुस्काते, टाटा बाय बाय  करते,
.........................................................
........................................................
    गाँव रोमांटिक है,
    ट्रेन की खिड़की से.

२.

आओ,
पधारो !

माई बाप आप हो,

पढ़ी होंगी, 
किताबें हज़ार, हमारे बारे में.
लिख दोगे 
किताबें हज़ार, हमारे बारे में.

महाराज हैं
आप सभी लोग
आओ 
पधारो!

खँडहर हम,
बिखेर जाओ थोड़ी जूठन,
आखिरी बार आना है 
माई बाप, किसी गाँव आपका.

Thursday, October 13, 2011

मटमैले पहाड़ पर हरियाली ...

१.

घूमती धरती 
छलांग लगा जाता हूँ,

तेरी कक्षा से परे 
गिर जाता हूँ ,
शून्य में कहीं !

२.
 धुंए में बादल
बनाते थे,
वह बचपन था .

बादल को धुंआ धुआं 
देखा आज.


३.
 मटमैले पहाड़ पर हरियाली 
बेतरह तेरी याद आती है .

४.

कैनवास ,
धरती क्षितिज औ आकाश 
भागते चित्र 
सजोयें लम्हों तक 

ज़िन्दगी सिमटते जाना.

५.

उदास मुस्कान फूलों की,

मेरे भीतर 
ततैया मर जाता है .

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...