हर सुबह,
जग कर लगता है
समय का अंत नहीं,
नस दिमाग की
औ
दिल सीने में
हर सुबह,
धडकते मिलते हैं .
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
" दुहराता खुद को रोज,
ReplyDeleteलौटता नहीं पर कभी...
समझना कठिन जिसे,
...समय वही "
बहुत ही जीवंत विचार...
ReplyDeleteसुन्दर....
ReplyDeleteशुक्रिया सुषमा
ReplyDeleteमनीष बहुत अच्छे
bhaut hi khubsurat....
ReplyDeleteसागर बहुत बहुत शुक्रिया
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