ज़िन्दगी
डायरी कर देखें,
उदास सारे पन्ने
कोरी पूरी
तुमसे पहले खाली
तुम्हारे बाद
केवल सन्नाटा.
धुली इस बारिश
तुम्हारे रहते लिखी
चंद राहें.
कितना जानें कितना मानें ख़ुद को कितना पहचानें । कहाँ रेफ है सेफ़ कहाँ है बीता कितना बचा कहाँ है कितना कच्चा-सड़ा हुआ है मौत मौत है ज...
kuchh kathin sa hai aapki rachanaon ko samajhana...
ReplyDeletethode se sabdo me bahut kuchh samaaya hota hai...
यह मेरी अक्षमता है जो कविता समझ के घेरे में समा नहीं पाती..........तिस पर भी तारीफ का बहुत बहुत आदर ............
ReplyDeleteये आपकी अक्षमता नहीं , खाशियत है आप गागर में सागर भरने की विधा जानते है. मोती निकलने के लिए सागर में डूबना पड़ता है.
ReplyDeleteजो ये रचनाये नहीं समझ सकते निश्चय ही उनमे अध्ययन की कमी है. like me.