Monday, July 15, 2013

वक़्त है,
कि थिर वहीं।
तुम्हे बदलते देखा,
समय और मैंने।

ख्वाब रहे,
अजन्मे।
क़त्ल करता रहा,
जागता रहा मैं।

तुम हो,
कि प्रेय अब भी।
आस छोड़ी बस
ज़िन्दगी और मैंने।









Thursday, July 4, 2013

ढह जाना यूँ....

१.

ढह जाना
यूँ है कि,
खंडहर  दीखे नहीं

और  मलबा
समा जाए सीने में।

२.

टूटना
इस कदर,
कंहर के रह जाएं

न टूटे, न बिखरें
ख़त्म हो, सपना देखना।





  

एक ही, सुख

१.

एक ही,
सुख
दुःख नहीं अनपेक्षित।

२.

एक ही,
अभाव
कर सकना प्यार।

३.

एक ही,
दुःख
सुख नहीं सपना भी।

Wednesday, June 19, 2013

हमारी नियत इतनी ॥

१. 

न  चकित 
निराश नहीं । 
प्रेम, सत्कार 
परे , किसी छुअन से भी 
अभाव, भाव का 
 हमारी नियत इतनी ॥                               

२.  

हमें तलाश नहीं 
न आकांक्षा 
हमारा दौर 
असमय से समयातीत  
शून्य, समाज 
हमारी उपलब्धि ॥                                       

Monday, June 17, 2013

मैं, सो नहीं पाता॥

१. 

मेरी खिड़की से 
बहुत दूर 
नज़र आता है 
चाँद । 
अपनी हद से 
परे 
मैं,
जा नहीं  पाता  ॥   
                                          
२. 

रात और बढ़ जाती है 
जगा 
देख , मुझे । 
बंद आँखों भी, 
मैं, 
सो नहीं पाता॥  
                                                                      
३.

बेतरह  
लगती है,  भूख 
देख  रसोई  । 
भटक गया हूँ ,
इतना, घर 
मैं,
पहुँच नहीं पाता ॥                         

Friday, June 14, 2013

ख़याल कई

ख़याल कई,  
नहीं बांटे ॥  

बताया तो था, तुमको 
भोर की ओस, छूने की कशिश, 
चाहत मोर पंखों की, 
ख्वाब, नीले धुनों पर  थिरकन ॥ 

नहीं बताया कभी 
डर, झांकते कुँए में गिरने का 
भय, चलती ट्रेन से कूद जाने का 
दुह्स्वप्न आत्महत्या का  
तुमने भी तो छिपाया, मुझसे 

जो न, बांटो 
घट  जाता है ॥ 

Thursday, June 13, 2013

शुरू के चन्द चक्कर

शुरू के चन्द चक्कर 
लोग कहते हैं, हैं 
मुश्किल । 

हर सुबह ही , बस 
दुश्वारी 
दिन कट जाता है ।  

कुछेक चक्कर बाद 
पाँव खुदबखुद खींचते खुद को 
दिन ढो लेता है. 

सुबह की दौड़ औ ज़िन्दगी 
धकेल रहे खुद को 
चंद  चक्कर बाद 
रुक जाता हूँ 
रोज़ 
मशीनी दौड़ से आजिज़ आ,

बेशर्म ज़िन्दगी 
हर सुबह 
वही तमाशा करती ॥ 

रोज़ ही दौड़ने जाता हूँ  
मैं ॥  

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...