Thursday, June 16, 2011

नई भाषा 
जिसे समझते हम केवल
नए गीत 
जिसे गाते हम केवल

हम देखते चार आँखों से
दो आँखों में तैरता 
मेरा बचपन 
दो आँखों में
रंगोली तेरी

नई गिनती 
जो नापती देह तेरी
नए चिह्न 
पहुँचाने को मेरे ख्वाबों तक

मैं जानता था 
मर जाओगी तुम इक दिन 
कुछ भी नया नहीं हुआ
तुम नहीं बची जिन्दा 

टूटे ख्वाब पर 
नहीं आया रोना मुझको.



Wednesday, June 15, 2011

जब  कभी
बच के निकलती 
तुम
छतरी ताने 
बचते हुए बर्फ वा बारिश से

तुम पर उड़ेल देता 
कर बादल उल्टा,
बंद मट्ठी में लाता
चुटकी बर्फ तुम्हे चखने को 
तुम नाराज़ होती 

मै जानता 
दिखावा है नाराज़ होना..

तप्त मन को पड़े फफोले 
हुई बारिश जब जम कर
मन और तपा
मैं और जला 
टूटे ख्वाब पर नहीं आया रोना मुझको..



Friday, June 10, 2011

गज़लें ...1.

रात गत होते, बारहा याद आए तुम
 पहले पहल आज ही, भूला तुमको .

मेरे अफ़साने पे, नहीं मुझको ही यकीं 
जला जो दिल , धुआं लगा तुमको .

तुम्हारे रंग कई थे,हैं, औ रहेंगे हरदम 
उदास आँख मेरी, देगी न जला तुमको .

मन था पत्थर  , अब तरल पिघला 
खुद में कैद, बौना सा दिखा  तुमको .

मलाल चाँद करेगा, रात कर रौशन
तोड़ते ख्वाब सब, ख्याल न आया तुमको .











Wednesday, June 8, 2011

जलना आत्मा का.........

रक्त जल, 
बने कालिख
तब 
बंद हो शायद 
सुलग जलना आत्मा का ?

भष्म 
सब स्वप्न कर 
आहुति दी 
संकल्पों की ;
फिर भी 
धुआं धुआं
सा जलता क्यों है .

क्या 
सचमुच  है 
कोई इश्वर,
लेता हुआ बदला .

धुआं धुआं 
बन 
छोड़ रही है,
आत्मा 
मेरा संग 

एक दिन आएगा
धुआं 
 ख़त्म हो जायेगा धुंए की तरह  
साथ में मेरा मैं. 




Saturday, June 4, 2011

अधूरे स्वप्न.....1.

तुम नाराज़ हो, उठने लगती,
समेट तुम्हे बाहों के घेरे 
सुनाता 
कई बार कहानी वही 
नायिका जिसकी, तेरी परछाई .

बंद मुट्ठी  में लाता,
थोड़े बादल..थोड़ी बारिश..
मलता होंठो पे तुम्हारे  थोड़ी बर्फ  
बाल कर गीले, छू लेता  
खा लेता थोड़ी डांट तेरी .

सारी रात 
साथ बुनते गीत
सारे दिन तुम अलसाती .  

पढ़ते हम  
कम किताबें-
बांया मैं, दांया पन्ना तुम .  
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आज
जब किताबों की
की चिंदी,
अधूरे ख्वाबो पे नहीं आया रोना...

Friday, June 3, 2011

सड़कछाप लड़की-1.

सड़कछाप लड़की

सुलभ सबको
सबसे ही सहज

नहीं दबाती
अपनी हंसी
नहीं छिपाती
अपनी ख़ुशी

सड़कछाप लड़की
बनाती सफ़र को हसीं

अनेक से प्रेम,
मित्र अन्तरंग कई
सड़कछाप लड़की ;
रिक्त/ अपूर्ण कई
को करती पूर्ण .

सड़कछाप लड़की
ज़रूरी है .



Thursday, June 2, 2011

उदासी

१.

समय 
कुतरते
शाम
ढलते ढलते
उदासी
पा जाती है ;
मैं छिप नहीं पाता .

रात 
कटे 
टुकड़ा टुकड़ा 
मरते




१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...