नई भाषा
जिसे समझते हम केवल
नए गीत
जिसे गाते हम केवल
हम देखते चार आँखों से
दो आँखों में तैरता
मेरा बचपन
दो आँखों में
रंगोली तेरी
नई गिनती
जो नापती देह तेरी
नए चिह्न
पहुँचाने को मेरे ख्वाबों तक
मैं जानता था
मर जाओगी तुम इक दिन
कुछ भी नया नहीं हुआ
तुम नहीं बची जिन्दा
टूटे ख्वाब पर
नहीं आया रोना मुझको.