१.
बंद दराज़ से निकल
छा जाता है ,
धुंधले अंधियारे सा
घेर लेता है
अकेलापन.
२.
स्याह
मन का फैलाता हुआ
चुप चाप पैठ जाता है
मन पर छाया
अकेलापन.
३.
साथ तुमको लिए चलता है
अकेले नहीं आता
अकेलापन.