तुम्हारे नख चीरते है गहरा
काट चुटकी खुद गाल की
नहीं नाप पाता मै
जख्म की गहराई
तुम्हारे प्रेमाभिब्यक्ति ने
सुन्न कर दिया है
मेरा सम्बेदना तंत्र.
कितना जानें कितना मानें ख़ुद को कितना पहचानें । कहाँ रेफ है सेफ़ कहाँ है बीता कितना बचा कहाँ है कितना कच्चा-सड़ा हुआ है मौत मौत है ज...