छत पर मेरे कौवे आते
तरह तरह करतब दिखलाते।
बोला मोटा कौवा एक दिन
अच्छा नहीं लगता मेरे बिन
बोला दुबला कौवा फिर
लाओ खिलाओ दूध औ खीर।
बोले कौवे सुबहो शाम
जय जय भैय्या जय जय राम।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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