हक़ कोई मुझे सवालात का ?
जवाब नहीं कोई
पास मेरे।
रस्म ज़िन्दगी निभाने की ?
मौत इर्द गिर्द
पास मेरे।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
No comments:
Post a Comment