Friday, November 23, 2012

अबूझ ही हम अच्छे

1.

समझाना, तुम्हे लगता मुश्किल;
समझना, असंभव मुझको।
अबूझ ही हम अच्छे।

2.

कीमत जाती है, तेरे हिस्से से;
चुनता मैं, दर्द रवां करने के तरीके।
खरीद-भुगतान को इस तरह बांटा हमने।

3.

 किसी के जिम्मे न आए, तोहमत,
 दुसरे का कष्ट, न हो ज्यादा।
 इस कदर जिम्मेदारी, ढोते हम।      
  

 
   

2 comments:

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...