Saturday, January 5, 2013

2012

1.

समय नहीं बीता / मैं हुआ, समय बीता।

2.

मुर्दा मुझमे, दफ्न न हुआ सच।

3.

हंस नहीं पाया / रोया तो बस रोना आया।

4.

तुम मिले, तुम खो गए / रहे तुम, खो गया मैं।

5.

मार दिया मैंने / छू भी न गया एहसास एक।

6.

आठ रस हुए पूरे / ज़िन्दगी नहीं एकाकी।

7.


शब्द हुए निष्फल / कलप कलप चीखा  मौन।


8.

दिन बीते, अँधेरा छाया रहा हरदम।







3 comments:

  1. कलप-कलप चिंखा मौन .............
    क्या बात है...दर्द बहुत ज्यादा हो तो मौन रुदन ही व्यक्त कर पता है दुःख को .बेहतरीन कविता.साधुवाद.

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