Saturday, January 1, 2022

तंत्र से जन घोंट कर बना वह ईसा है

बहुत लम्बे कान हैं, 

सुनते नहीं कुछ साजिश सिवा  

नुकीली लम्बी नाक है, 

सूंघते हैं साजिश 

आंखों से अँधा है  

अंधा तो अंधा है।  

नेता है गंदा है। 

चाक मध्य पीसा है 

जनता का कीसा है।  

पर 

पूज्य है, पूजनीय है 

महा है, महनीय है 

तंत्र से जन घोंट कर 

बना वह ईसा है 

अपना 

मसीहा है। 



Sunday, September 26, 2021

विषय- हिंदी-भाषा, पाठ-२ - विपरीत शब्द-युग्म

कक्षा - ०२, विषय- हिंदी-भाषा, पाठ-२ - विपरीत शब्द-युग्म 

१. सार्थक - निरर्थक

पुरानी किताब: सार्थक क्रिया, निरर्थक प्रयास। 

नई किताब: सार्थक जीत, निरर्थक विपक्ष।  

२. अर्थ-अनर्थ

पुरानी किताब: झाँसना - अर्थ, वैर-अनर्थ। 

नई किताब: जीत- अर्थ, हार- अनर्थ।  

३. उपयोगी -अनुपयोगी

पुरानी किताब: रामधुन उपयोगी, गांधी अनुपयोगी ।

नई किताब: दंगा उपयोगी, संविधान अनुपयोगी। 


 


Saturday, September 25, 2021

 ठहरी बात रही 

मेरी तेरी, पूर्ण है वचन उसका 

कहा अनकहा 

मसीहा स्वर है, शब्द है, भाव है 

हम ठहरे हैं, ठहरी बात पर.


2.

हमारा काम,

काम आ जाना 

मसीहा, वही काम है.


3.

राग लय विन्यास भिन्न नहीं 

मेरे तेरे 

हमारा अनुनाद, मसीहा संग. 


Thursday, September 23, 2021

अनायास मुस्कान

तीव्र प्रेय आकांक्षा 

कभी 

स्नायु दबाव

आस पास रही हो तुम

बिना कॉमा लिखी गई कविता 

पूर्ण विराम पाती तुम पर.


2.

तुम 

सर्वनाम हो

विस्थापित करती मेरी संज्ञा को.


3.

मेरी महत्ता

तुम विशेषण. 


Sunday, September 19, 2021

भाषा

एक भाषा

क्या होगा उसका जो ढोती है केवल झूठ.

याद रखी जायेगी, एक विलुप्त झूठी नदी की तरह 

या 

बहती रहेगी, ढोती हुई लोकतंत्र का सच 

मसीहा की जयकार 

संस्थाओं की लाश।  

बहती रहेगी क्या तब भी जब आडम्बर नहीं होंगे 

नहीं होंगे पंचसाला चुनाव। 

जब झूठ नहीं होगा फ़र्क़ सच से,

क्या ज़रुरत होगी भाषा की।   

Thursday, June 10, 2021

सर पर ताज हो

सर पर ताज हो 

मन भर आनाज हो 

काम नहीं काज हो 

साहेब सा  राज हो। 


चार चापलूस हों 

हज़ार जासूस हों 

कोटि कोटि भक्त हों 

बोटी हो रक्त हो 

कभी नहीं हार हो 

जय हो जयकार हो।  


नंगा हो भूका  हो  

मोटा हो सूखा हो 

शुन्य प्रतिकार हो 

अपनी सरकार हो।  






Tuesday, February 16, 2021

महान राष्ट्र यूं जन्म ले रहा है

अंधे कवियों ने लिखी महान कविताएं 

बहरे बीथोवेन ने सिम्फनी 

कटे पैर लोग चढ़ जाते हैं पहाड़।


नागरिक चाहते हैं

राष्ट्र भक्त होना। 

चाहते हैं,

न बदले कुछ भी  

रटे हैं, विकल्पहीनता।


महान राष्ट्र यूं जन्म ले रहा है।   

 

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...