सर पर ताज हो
मन भर आनाज हो
काम नहीं काज हो
साहेब सा राज हो।
चार चापलूस हों
हज़ार जासूस हों
कोटि कोटि भक्त हों
बोटी हो रक्त हो
कभी नहीं हार हो
जय हो जयकार हो।
नंगा हो भूका हो
मोटा हो सूखा हो
शुन्य प्रतिकार हो
अपनी सरकार हो।
सर पर ताज हो
मन भर आनाज हो
काम नहीं काज हो
साहेब सा राज हो।
चार चापलूस हों
हज़ार जासूस हों
कोटि कोटि भक्त हों
बोटी हो रक्त हो
कभी नहीं हार हो
जय हो जयकार हो।
नंगा हो भूका हो
मोटा हो सूखा हो
शुन्य प्रतिकार हो
अपनी सरकार हो।
अंधे कवियों ने लिखी महान कविताएं
बहरे बीथोवेन ने सिम्फनी
कटे पैर लोग चढ़ जाते हैं पहाड़।
नागरिक चाहते हैं
राष्ट्र भक्त होना।
चाहते हैं,
न बदले कुछ भी
रटे हैं, विकल्पहीनता।
महान राष्ट्र यूं जन्म ले रहा है।
१. पूछो राम कब करेगा यह कुछ काम । २. कर दे सबको रामम राम सत्य हो जाए राम का नाम उसके पहले बोलो इसको कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...