Friday, April 1, 2011

जीवन दीप जले न जले

बरस रहा है जमा गर्द, जमी धूल, थमा बादल
भीग के और भभका,   अदबदा जलता आंवा ;

बार बार तसल्ली , बार बार थपकी
टूट भी न रूकती सिसकी, रुके न आक्रंदन ;

      परिक्रांत मन न देखे,  बने अनबने राह नए 
जीवन दीप जले न जले, उठे न राख से अखनुख कोई.

Tuesday, March 29, 2011

दुःख २

दुःख का खुद में नहीं है महत्व

दुःख कर देता है सुन्न

सुख को बांटने , सुख को दिखाने
  सुख को पचाने के रास्ते बनाता आता है सुख

दुःख देता है जड़ता 
जड़ मन कर देता है
कलई दुःख की/ जीवन दर्पण में 
प्रतिबिम्बों के घेरे में दुःख ही दुःख 
साथी बनते है/ दुखी मन के 

Sunday, March 27, 2011

मै चाहता हु.3......

मै चाहता हूँ
चर्च न लिखे हमारी भूगोल पुस्तिका 

चर्च लिख  दे शायद 
धरती है चपटी

मै चाहता हु धरती रहे गोल हमेशा 
घूम फिर कर मिलने की गुंजाईश रहती है बाकी......

मै चाहता हु 2.....

मै चाहता हूँ 
 मृत्यु  आये न कभी  

ज़िन्दगी ठहरी हुई भी 
इंतज़ार करती है किसी विच्छोभ की

मृत्यु का आना इंतज़ार का कत्ल है

संभावनाओ की कल्पना
रोमांच की संभाव्यता है

मै चाहता हूँ 
अंत न हो संभावनाओ का.

मै चाहता हु

मै चाहता हूँ
बदल दू मुस्कान मोनालिसा 

चींख मारे चिग्घाड़  कर 
या हंस दे मुह बा कर
रहस्य आ कर सुलभ नहीं रहने देता मुस्कान

मै चाहता हूँ
मोनालिसा को अपनी जद में लाना .........

Tuesday, June 1, 2010

संजय के लिए ghost writing करते हुए बरसों पहले लिखा था इसे .

                 तुम्हारे नख चीरते है गहरा
                 काट चुटकी खुद गाल की
                 नहीं नाप पाता मै
               जख्म की गहराई

  तुम्हारे प्रेमाभिब्यक्ति ने
 सुन्न कर दिया है
मेरा सम्बेदना तंत्र.



 
                                             

Friday, May 28, 2010

DUKH..............

                                                                    १.
 सुख को कई उपमानो से
ब्यक्त कर सकता हूँ

दुःख को माप नहीं पाता भाषिक यन्त्र
पीड़ा  आंसुओ को छिपा ब्यक्त नहीं कर सजती अपनी उठान

दुःख स्मृति भर बक पाती है कविता

दुःख उन्छुआ निकल जाता है शब्द घेरों से
 रो नहीं सकने पर

दुःख रह जाता है अनकहा

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...